जोधपुर. प्रेम-सद्भाव और रंग-गुलाल का त्योहार होली रविवार को पारम्परिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। अगले दिन सोमवार को धुलंडी मनाई जाएगी।
पंडित ओमदत्त शंकर के अनुसार इस बार होलिका दहन पर भद्रा की छाया नहीं रहेगी। भद्रा दोपहर 1.53 बजे समाप्त हो जाएगी। प्रदोष व्यापिनी फाल्गुनी पूर्णिमा में होली दहन होता है। इस बार रविवार को प्रदोष समय में श्रेष्ठ मुहूर्त और शाम 5.35 बजे के बाद सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि का दुर्लभ योग भी बना है। जोधपुर में प्रदोष का समय शाम 6.49 बजे शुरू होकर 7.01 बजे रहेगा। प्रदोषकाल में शाम 6.49 से 7.01 बजे तक तथा बाद में शुभ अमृत चौघडि़ए में शाम 6.49 से रात 9.46 बजे के मध्य होलिका दहन करना सर्वश्रेष्ठ व उत्तम माना गया है। होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक समाप्त हो जाएंगे।
बन रहा है होली पर दुलर्भ योग
इस बार होली पर ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है । होली पर्व पर चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेगा। इसके अलावा मकर राशि में गुरु और शनि विराजमान होंगे। शुक्र और सूर्य मीन राशि में रहेंगे। मंगल और राहु वृषभ राशि, बुध कुंभ राशि और मोक्ष के कारण केतु वृश्चिक राशि में विराजमान होंगे। ग्रहों की ऐसी स्थिति के कारण ही इसे ध्रुव योग कहा जा रहा है। इस तरह से ग्रहों का योग 03 मार्च, सन् 1521 को बना था।इसके अलावा होली इस बार होली सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी। होली पर अमृतसिद्धि योग भी रहेगा। इसके अलावा दशकों बाद होली पर सूर्य, ब्रह्मा और अर्यमा की साक्षी भी रहेगी। जो दूसरा दुर्लभ योग है। होली सर्वार्थसिद्धि योग में मनेगी। साथ ही साथ इस दिन अमृतसिद्धि योग भी रहने वाला है।
होली पर ग्रहों की चाल
होली के दिन ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही साथ हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में रहने वाले है। वहीं, शुक्र और सूर्य मीन राशि में विराजमान रहेंगे। जबकि, शनि और बृहस्पति देव मकर राशि में रहने वाले हैं। ऐसी स्थिति कई वर्षों बाद बन रही ।
होली में इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, ध्रुव योग, अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिन्हें मुहूर्त शास्त्र में बहुत ही शुभ माना जाता है। वहीं ग्रह नक्षत्र की बात करें तो, होली के दिन चंद्रमा कन्या राशि में स्थित होगा। इसके अलावा दो सबसे बड़े और अहम ग्रह शनि और गुरु, होली के दिन मकर राशि में विराजमान होंगे। वहीं शुक्र और सूर्य ये दोनों ही मीन राशि में रहेंगे। मंगल और राहु वृषभ राशि में, बुध कुंभ राशि और केतु वृश्चिक राशि में विराजमान होगा।
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