कोरोना काल में प्रवासियों के लिए संजीवनी साबित हुई मनरेगा

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

राजेन्द्र सिंह दूदौड़/जोधपुर. लॉकडाउन के कारण मजदूरों के सामने पैदा हुए रोजगार के संकट के बीच प्रदेश में मनरेगा संजीवनी साबित हो रही है। कोरोना काल में मजदूरों को मजदूरी का संकट खड़ा हो गया था। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के कारण मजदूरों को आसानी से रोजगार मिल गया। गौरतलब है कि कोरोना को लेकर जब देशभर में लॉकडाउन हुआ तो शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में रोजगार का संकट खड़ा हो गया। प्रदेश के प्रवासी मजदूरों के सामने भी जबरदस्त रोजगार की समस्या खड़ी हो गई थी। लेकिन मनरेगा के कारण प्रवासी मजदूरों को गांवों में मजदूरी की इतनी समस्या नहीं आई।

जिला परिषद मनरेगा के अधिशासी अभियंता नरेश बोहरा के मुताबिक जिले में वर्ष २०१९-२०२० में २ लाख ८२ हजार ८८८ परिवार, ३ लाख ८४ हजार ४४४ मजदूरों व एक करोड़ ७२ लाख ७०३ दिवस मजदूरों ने कार्य किया। जबकि वर्ष २०२०-२०२१ में ३ लाख ५६ हजार ५०२ परिवार, ४ लाख ८१ हजार ६६५ मजदूरों व २ करोड़ १५ हजार ८ दिन मानव दिवस काम हुआ।

यह हैं टॉप पांच जिले
- बाड़मेर प्रथम स्थान पर, ४ लाख ६२ हजार ८४२ परिवारों के ७ लाख ७६ हजार ६७८ श्रमिकों को मजदूरी

- भीलवाड़ा दूसरे स्थान पर, ४ लाख ४२ हजार ७८० परिवार के ६ लाख २३ हजार ६३० लोगों को मजदूरी

- तीसरे स्थान पर नागौर। ४ लाख १९ हजार १३४ परिवार के ५ लाख ८८ हजार १३२ श्रमिक नियोजित हुए

- चौथे स्थान पर बांसवाड़ा में ३ लाख ६५ हजार ५७१ परिवार के ६ लाख ४९ हजार ७६७ श्रमिक

- पांचवे स्थान पर जोधपुर जिले में ३ लाख ५६ हजार ५०२ परिवार के २० लाख १५ हजार श्रमिकों को मजदूरी मिली



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3eq4kGx
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment