जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के ऐतिहासिक और पुरा स्मारकों के संरक्षण की मौजूदा स्थिति पर न्याय मित्र की रिपोर्ट पर राज्य सरकार को अपेक्षित कार्रवाई करने को कहा है।
न्यायाधीश संदीप मेहता तथा न्यायाधीश देवेन्द्र कछवाहा की खंडपीठ में उदयपुर स्थित सूरजपोल की दीवार गिरने के मामले में स्वप्रसंज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। बाद में राज्य में पुरा स्मारकों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए जनहित याचिका का दायरा बढ़ाते हुए अधिवक्ता राजवेन्द्र सारस्वत को न्याय मित्र नियुक्त किया गया। न्याय मित्र ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश कर दी है, जिसकी प्रति अतिरिक्त महाधिवक्ता करणसिंह राजपुरोहित को दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य के पुरातत्व व संग्रहणालय विभाग के अधीन 342 स्मारक संरक्षित घोषित हैं और 43 स्थानों को पुरा महत्व के लिहाज से संरक्षित घोषित किया गया है। पिछले सात सालों के बजट आवंटन व खर्च का ब्यौरा देते हुए बताया गया कि बजट पूरा खर्च नहीं किया जा रहा, जिसके चलते पुरा स्मारकों की स्थिति बेहतर नहीं है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 2959.20 लाख रुपए स्मारकों के मरम्मत पर खर्च किए गए हैं, जिन पर अब तक केवल 22 प्रतिशत राशि ही 39 स्मारकों पर व्यय की गई है। विभाग स्मारकों के संरक्षण के प्रति ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहा। रिपोर्ट में संभाग वार पुरा स्मारकों की स्थिति का ब्यौरा दिया गया है।
सारस्वत ने रिपोर्ट में कहा कि जोधपुर जोन के अधीन 64 संरक्षित स्मारक तथा पुरा स्थल स्थित हैं। इनमें बिलाड़ा स्थित शिव मंदिर, कुकुदेवल कीर्ति स्तंभ, मेड़ती गेट तथा झालरा को तत्काल संरक्षण व पुनरुद्धार की दरकार है। रिपोर्ट में पुरा स्मारकों की स्थिति का आकलन करने के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने, बजट आवंटन की यूनिफॉर्म नीति लागू करने तथा हेरिटेज गार्डनिंग सहित कई सुझाव दिए गए हैं।
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