जो 'बीड़ी का आकार नहीं ले सका अब सरकार को दे रहा पांच गुणा ज्यादा राजस्व

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-नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. वन उत्पादों में शामिल तेंदूपत्ता पिछले साल श्रमिकों के अभाव में बीड़ी का आकार नहीं ले सका था लेकिन इस बार जोधपुर संभाग का पाली जिला राज्य सरकार को पिछली साल की तुलना में पांच से छह गुणा अधिक राजस्व देने में सहयोगी साबित हुआ है। जबकि राज्य के दूसरे वन मंडलों के अधीन इकाइयों से प्राप्त राजस्व लगातार घटता जा रहा है। पाली वन मंडल के तेंदू पत्ता संग्रहण की दो पड़त नाणा-बेड़ा है। इन रेंजों में कोविडकाल के दौरान तेंदू पत्ता के ठेके के लिए व्यापारी आने को बिलकुल भी तैयार नहीं थे। इसका प्रमुख कारण श्रमिक समस्या थी। बामुश्किल पहुंचे व्यापारियों को दोनों ही रेंज में क्रमश: 65 हजार और 1 लाख 10 हजार में ठेका दिया था जिसके भुगतान के लिए भी कई समस्याएं आई। इससे काफी राजस्व का नुकसान हुआ। लेकिन इस बार कई गुणा बढ़ोतरी हुई। जो ठेका पिछले साल 65 हजार में गया वो इस बार तीन लाख और 1 लाख 10 हजार का ठेका छह लाख में गया। हालांकि पिछले सालों में तेंदू पत्ता के ठेकों से 8 लाख तक का राजस्व अर्जित होता रहा है।

प्रदेश की इकाइयों में भी घट रहा राजस्व
वर्ष 2017-18 में राज्य सरकार को तेंदू पत्तों के विक्रय से 7890 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ जो 2018-19 में घटकर मात्र 3462 लाख हो गया। वर्ष 2019-20 (31 दिसम्बर 2019 तक ) में यह राजस्व घटकर मात्र 984 लाख रह गया।

होने लगी नुकसान की भरपाई

पाली वन मंडल के तेंदू पत्ता संग्रहण की नाणा-बेड़ा रेंज में कोरोनाकाल के दौरान तेंदू पत्ता के ठेके क्रमश: 65 हजार और 1 लाख 10 हजार में दिए गए जिससे काफी राजस्व का नुकसान हुआ। लेकिन इस बार जो ठेका पिछले साल 65 हजार में गया वो तीन लाख और 1 लाख 10 हजार का ठेका छह लाख में गया है।
जयदेव चारण, सहायक वन संरक्षक पाली

सरकार की आय का प्रमुख स्रोत

राजस्थान राज्य के वन उत्पादों में तेन्दू पत्ता लघु वन उपज आय प्राप्ति का प्रमुख स्त्रोत है । तेन्दू के वृक्षों से प्राप्त पत्तों से बीडी बनाने का कार्य किया जाता है । तेन्दू के वृक्ष जोधपुर वनमंडल के अधीन सिरोही व पाली वन क्षेत्रों में भी पाए जाते है । वर्ष 1974 में राजस्थान तेन्दू पत्ता ( व्यापार का विनियमन ) अधिनियम 1974 पारित होने के बाद राज्य सरकार ही तेन्दू पत्ता का व्यापार करने के लिए अधिकृत है । वर्ष 2019-20 के लिए राज्य की कुल 167 इकाइयों में से 134 इकाईयों का व्ययन हुआ एवं शेष 33 इकाईयों को पडत रखी गई । जिनके बेचान से 31 दिसम्बर 2019 तक लगभग 984 लाख रु की आय हुई थी।



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