जोधपुर. साल 2020 में कोरोना जोधपुर और देश ही नहीं वरन पूरे विश्व में छाया रहा। हर साल जोधपुर में आने वाले स्वाइन फ्लू के मामले में बीते वर्ष छुप से गए है। एक ओर जहां कोरोना के केस साल 2020 में 50 हजार से अधिक आए तो दूसरी ओर स्वाइन फ्लू के महज 5 मामले ही सामने आए। कुल मिलाकर कोरोना वायरस के सामने स्वाइन फ्लू वायरस दबा हुआ रहा।
स्वाइन फ्लू की मृत्यु दर 1 से 4 प्रतिशत है, जबकि कोरोनावायरस की मृत्यु दर 1 से 2 प्रतिशत के मध्य मानी जाती है। फिर भी कोरोना से खतरनाक स्वाइन फ्लू को माना जाता है। जबकि कोरोना वायरस तेजी से फैलने के लिए जाना जाता है। दोनों बीमारियां फेफड़े को प्रभावित करती है, इसमें खांसी, जुकाम व बुखार होने जैसे लक्षण भी आम है।
स्वाइन फ्लू हर दो साल से आ रहा है: डॉ खत्री
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सीनियर प्रोफेसर डॉ. पीके खत्री ने बताया कि स्वाइन फ्लू सीजनेबल बीमारी है। देखा जाता है कि स्वाइन फ्लू दो साल बाद आता है और बीच में नहीं आता है। यानी के डाउन और फिर अचानक राइज होता है। कोरोना महामारी के रूप में आया, इसलिए अधिकत्तर केस इसके ज्यादा मिले। दूसरा कारण है कि स्वाइन फ्लू व कोरोना के लक्षण एक जैसे है, कोरोना की जांच भी ज्यादा हुई है।
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