जोधपुर. शीतकाल में प्रवास पर आने वाले पक्षियों को थार में तापमान बढ़ोतरी के साथ अपने वतन की याद आने लगी है। कुरजां पक्षियों के अलग-अलग समूह अपने गंतव्य की ओर उड़ान भरने लगे हैं।
उत्तरी रूस, उक्रेन तथा कजाकिस्तान में जब बर्फ जमने लगती है तो सारस प्रजाति के सदस्य कुरजां हजारों की तादाद में समूह के रूप में जोधपुर जिले के खींचन में पड़ाव डालती है। इस बार प्रवास के लिए ३१ हजार कुरजां खींचन पहुंची थी। मंगलवार तक छह ग्रुप के करीब चार हजार पक्षी अपने गंतव्य की ओर से उड़ान भर चुके हैं। शेष पक्षी भी आकाश में ऊंची उड़ानें भरकर जाने का संकेत देने लगे हैं। खींचन चुग्गा घर में पक्षियों की देखभाल करने वाले पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि खींचन से कुरजां के ६ समूह रवाना हो चुके हैं। शेष बचे करीब 2५ हजार पक्षी भी धीरे-धीरे रवाना हो जाएंगे।
एेसे मिलता है रवानगी का संकेत
शीतकाल प्रवास में पक्षी आसमान में विचरण करते हैं, लेकिन वतन वापसी के समय कुछ दिन पहले पक्षी आसमान में काफ ी ऊंचाई पर उड़ान भरने का अभ्यास करने लगते हैं। अभ्यास का सिलसिला करीब ५ से ६ दिन तक होता है। आकाश में ऊंचाई पर उड़ान भरना पक्षियों की रवानगी का संकेत है।
कोरोनाकाल, बर्ड फ्लू के बीच रहे सुरक्षित
इस बार प्रवासी पक्षियों को थार की आबोहवा खूब रास हुई। खींचन में ३० हजार से अधिक पक्षी कोरोनाकाल में पहुंचे और पूरे प्रदेश में बर्ड फ्लू की दहशत के बावजूद सुरक्षित रहकर प्रवासकाल पूरा कर रहे है। शीतकालीन प्रवास पक्षी वैज्ञानिकों व पक्षी विशेषज्ञों के लिए भी खास रहा। कई पक्षियों के पैरों में रिंगिंग कॉलर व सैटेलाइट टैग मिले थे। जिससे पता चलता है पक्षियों के प्रवास पर शोध करने वाले वैज्ञानिक उनकी स्थिति का आंकलन कर रहे हैं।
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