CUMIN RESEARCH---गुजरात के भरोसे हो रहा जीरा उत्पादन, राजस्थान में कई वर्षो से नई किस्म नहीं

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जोधपुर।

एक्सक्लूसिवमसालों में प्रमुख जीरा राजस्थान में सर्वाधिक मारवाड़ में होने के बावजूद भी कई वर्षो से जीरे की नई किस्म विकसित नहीं हुई है, इस वजह से जीरे की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। नई किस्म विकसित नहीं होने का प्रमुख कारण इसका रिसर्च सेंटर जोधपुर में नहीं होना है। जीरा का रिसर्च सेंटर जोबनेर जयपुर की कर्ण नगेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय में है । इस विवि के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में जीरा का क्षेत्रफल व उत्पादन नगण्य है। क्षेत्रफल व उत्पादन की दृष्टि से मण्डोर स्थित कृषि विश्वविद्यालय प्रदेश में अव्वल है, जिसके क्षेत्राधिकार में सर्वाधिक क्षेत्रफल व उत्पादन होता है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वर्ष 1975 में जोबनेर की कर्ण नगेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित मसाला अनुसंधान परियोजना स्थापित की गई। जोबनेर कृषि विवि के अंतर्गत जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा, धौलपुर, करौली, अलवर, सीकर आदि जिलें आते है। जोधपुर मण्डोर कृषि विवि के अंतर्गत जोधपुर, नागौर, बाड़मेर, पाली व सिरोही-जालोर जिलें आ रहे है।

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गुजरात की किस्म से हो रहा उत्पादन

पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक जीरा उत्पादन हो रहा है। इन क्षेत्रों के किसान जीरा बुवाई के लिए लगभग 99.9 प्रतिशत गुजरात की जीरे की जीसी-4 किस्म ही काम में ले रहे है। इस किस्म को भी लंबे समय से किसान काम में ले रहे है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर नई विकसित किस्म काम में नहीं ली गई तो किसान भविष्य में इस किस्म से अच्छा परिणाम भी नहीं ले पाएंगे।

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कुल क्षेत्रफल में जोबनेर का हिस्सा 1.61 प्रतिशत

प्रदेश का जीरा रिसर्च सेंटर होने के बावजूद जोबनेर कृषि विवि का हिस्सा क्षेत्रफल 1.61 प्रतिशत है, जबकि जोधपुर मण्डोर कृषि विवि का हिस्सा 67.57 प्रतिशत है। जोबनेर कृषि विवि मसालों के लिए शोध केन्द्र हर दृष्टि से जोधपुर कृषि विवि से पिछड़ा हुआ है।

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क्षेत्रफल से जाने हकीकत ( हैक्टेयर में )

विवि----- जीरा-------- सौंफ------ मैथी------ ---- कुल-

जोधपुर-- 643048--- 21625--- 14022----- -- 678695-

जोबनेर-- 5212------2439-----6892--------14543-

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मारवाड़ में जीरा का सर्वाधिक उत्पादन होता है। ऐसे में यहां अगर रिसर्च सेंटर स्थापित होता है तो नई किस्में विकसित होगी, जो किसानों के लिए फायदेमंद रहेगी।

डॉ. एमएल मेहरिया, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर व वैज्ञानिक

कृषि विवि जोधपुर

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