भावी (जोधपुर). निकटवर्ती ग्राम तिलवासनी स्थित गुरू जम्भेश्वर मंदिर प्रांगण मे चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत हरिकथा का समापन शनिवार को विशाल यज्ञ मे पूर्णाहुति के साथ हुआ।विशाल यज्ञ मे घी खोपरो की आहुति देकर पर्यावरण शुद्धि एव क्षेत्र मे खुशहाली की कामना की गयी । अंतिम दिन उपस्थित विश्नोई समाज को संबोधित करते हुए कथावाचक संत शिवजोतिषानंद महाराज ने कहा कि गुरू जम्भेश्वर जी बनाये गये उनतीस नियमो की परिधि मे रहकर कोई भी व्यक्ति अपना जीवन सफ ल बना सकता है । यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमो का पालन करता है तो उसके जीवन मे कीसी भी प्रकार की कठिनाई नही आ सकती । सभी को पर्यावरण एव संस्कृति को बचाये रखने के लिए गुरू जम्भेश्वर के बताये पद चिन्ह पर चलना चाहिए साथ ही अपनो से बडो एव गुरूजनो का सम्मान करना चाहिए। कथा को संबोधित करते हुए विद्वान संत राधेश्यानंद ने कहा कि आधुनिकता की चकाचौंध से बचकर हमे भगवान की भक्ति करनी चाहिए,शब्दवाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि आयो हकारो जीवणो बुलायो, के जीवणा ते करण कमायो अर्थात मनुष्य जीवन मिला है तो हमे हमेशा सत्कर्म करना चाहिए, जीवन भर का लेखाजोखा हमे आगे जाकर भगवान को देना है ,इसलिए जीवन मे अच्छे कार्य करो ।
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