जोधपुर. डूबतों को बचाने के पूर्वाभ्यास के लिए हैलिकॉप्टर से कायलाना झील में उतरने के बाद सेना का एक कैप्टन गुरुवार दोपहर लापता हो गया। जबकि पांच कमाण्डो सुरक्षित बाहर आ गए। डूबने की आशंका पर पुलिस व सेना के गोताखोरों ने कैप्टन को बाहर निकालने के लिए छह-सात घंटे तक रेस्क्यू किया, लेकिन कैप्टन नहीं मिला। अंधेरा होने पर राहत कार्य रोक दिया गया। शुक्रवार को एसडीआरएफ के बाद एनडीआरएफ के आठ गोताखोर भी झील पहुंचे। तीस से अधिक गोताखोर कैप्टन की तलाश कर रहे हैं। सेना ने सुरक्षा के लिहाज से झील को घेरे में ले रखा है।
सेना के हैलिकॉप्टर से राहत कार्य
यूनिट के सैन्य अधिकारी को ढूंढ निकालने के लिए सेना ने पूरी ताकत लगा दी। सेना के गोताखोरों के साथ हैलिकॉप्टर से भी गहरे पानी में गोताखोर उतारकर तलाश के प्रयास शुरू किए गए। सुरक्षा के लिहाज से सेना ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया और किसी भी आमजन को उधर जाने से रोक दिया गया।
पुलिस के अनुसार सेना की १० पैरा यूनिट के कमाण्डो डूबतों को बचाने के लिए सुबह कायलाना झील में पूर्वाभ्यास कर रहे थे। दोपहर साढ़े बारह बजे यूनिट का कैप्टन अंकित गुप्ता व पांच कमाण्डो हैलिकॉप्टर से रस्सी के जरिए कायलाना से तख्तसागर की तरफ पानी में उतरे। उन्हें झील में डूब रहे लोगों को बाहर निकालने का अभ्यास करना था। सभी को रस्सी की मदद से हैलिकॉप्टर से एयर लिफ्ट किया जाना था। अभ्यास के बाद पांच कमाण्डो बाहर आ गए, लेकिन गुडग़ांव निवासी कैप्टन अंकित गुप्ता गहरे पानी में जाकर डूब गए। सेना के अन्य कमाण्डो व जवानों ने देखा तो हतप्रभ रह गए। उन्होंने पहले तो बचाने का प्रयास किया, लेकिन कोई पता नहीं लग पाने पर यूनिट के अन्य अधिकारियों को अवगत कराया गया।
अपराह्न में सूचना मिली तो सहायक पुलिस आयुक्त (प्रतापनगर) नीरज शर्मा व राजीव गांधी नगर थानाधिकारी जयकिशन सोनी भी घटनास्थल पहुंचे। सेना के साथ पुलिस व स्थानीय गोताखोरों को राहत कार्य के लिए बुलाया गया, लेकिन सैन्य अधिकारी को शाम तक ढूंढा नहीं जा सका। अंधेरा होने की वजह से शाम साढ़े छह बजे राहत कार्य रोक दिया गया। अब शुक्रवार सुबह फिर से राहत कार्य शुरू किया गया। सेना ने इस संबंध में पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है।
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