जोधपुर. वैश्विक महामारी कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए पर्यटन क्षेत्र में इस बार दिसम्बर के विंटर वेकेशन में थार के इॅको टूरिज्म के प्रति क्रेज बढ़ा है। इससे पर्यटन से जुड़े लोगों में उत्साह और आशा की किरण जगी है। इस बार कोरोनाकाल में करीब ५ से ६ हजार पर्यटक कुरजां की अठखेलियां देखने पहुंचे है। जबकि खींचन में वनविभाग और सरकार की तरफ की पर्यटकों को सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। खींचन में कुरजां चुग्गा घर की नियमित देखभाल करने वाले सेवाराम माली ने बताया कि दिसम्बर माह में कुरजां को देखने के लिए सर्वाधिक पर्यटक पहुंचे है। पर्यटकों के पहुंचने का क्रम लगातार बना हुआ है।
वनविभाग की ओर से कोई प्रचार प्रसार नहीं
जोधपुर जिले में ईको टूरिज्म योजना को बढ़ावा देने के लिए वनविभाग की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन प्रसार प्रचार के अभाव में लंबे अर्से से ठप पड़ा है। जोधपुर के निकट गुड़ा विश्नोइयां के बड़ा तालाब काला हरिण बहुल क्षेत्र है जहां शीतकाल के दौरान एक ही जगह पर चिंकारे, कुरजां सहित कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी नजर आते है। जोधपुर आने वाले सैलानी इॅको टूरिज्म योजनाओं के प्रचार प्रसार और सुविधाओं के अभाव में पर्यावरणीय सम्पदा एवं वन्यजीवों की अठखेलियों के आनंद से वंचित है। गुड़ा में पर्यटकों के लिए कुल चार झोपेंनुमा वातानुकूलित कक्ष बनवाए गए जिसमें से एक कक्ष स्टाफ के लिए प्रयुक्त हो रहा है। एक कक्ष में मरम्मत कार्य बाकी है। इॅको टूरिज्म योजना के प्रसार प्रसार के लिए ब्रोशर तक नहीं है।
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