बिलाड़ावासियों के लिए सिरदर्द बना गोटन -सोजत मेगा हाइवे

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बिलाड़ा (जोधपुर). गोटन से सोजत रोड तक निकाला गया मेगा हाइवे बिलाड़ा कस्बे के पुराने सुभाष मार्ग होते हुए गुजर रहा है। इस क्षेत्र में यह मेगा हाइवे निर्धारित मापदंडों से इतना कम चौड़ा है कि टू वे मार्ग पर दो वाहन एक साथ नहीं गुजर सकते हैं। यही कारण है कि इस मार्ग पर दिन में कई बार वाहनों का जाम लग जाता है और कई बार दुर्घटनाएं भी घटती रहती है। ऐसी स्थिति में कस्बे को एक रिंग रोड की दरकार है।

पांच वर्ष पूर्व राज्य सरकार ने गोटन से सोजत रोड तक एक मेगा हाइवे मार्ग का निर्माण करवाया ।यह निर्माण कार्य सभी उस पुराने मार्ग से होकर ही निकाला गया जहां से पूर्व में सिंगल मार्ग गुजर रहा था। गांव के बीच गलियों से होकर भी यह मार्ग गुजरा तो जहां जितनी जगह उपलब्ध हुई उस मार्ग से ही सड़क का निर्माण कर दिया, जबकि मानदंडों के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग को कम पड़ रही जमीन अधिग्रहीत कर जमीन मालिक को मुआवजा देकर सड़क निर्धारित मानदंडों के अनुसार ही बनवाना था। इसका ख्याल कार्यकारी एजेंसी ने नहीं रखा तो विभाग ने भी अनदेखी कर डाली।

कस्बे की सड़क को ही बना दिया मेगा हाइवे

मेगा हाइवे की कुल चौड़ाई 20 मीटर निर्धारित है। इसमें 7-7 मीटर चौड़ी दो तरफ सड़क बनी होती है, बीच में 4 मीटर का डिवाइडर बना होता है और सड़क के दोनों ओर 1- 1 मीटर बारिश के पानी की निकासी के लिए नाला बनाया जाता है। जबकि बिलाड़ा कस्बे के पुराने सुभाष मार्ग सड़क जो मात्र 10 मीटर की चौड़ी है को मेगा हाइवे मार्ग का स्वरूप दे डाला। इस मार्ग निर्माण के दौरान न तो विभाग ने किसी की चबूतरी को हटाया और ना ही कोई छोटा- बड़ा अतिक्रमण हटाया,जहां जितनी जगह मिली उसी को मेगा हाइवे का स्वरूप दे दिया।

दिन में कई-कई बार लगता है जाम
मुख्य बस स्टैंड से नगर पालिका भवन तक के बीच बने इस मेगा हाइवे की चौड़ाई निर्धारित मानदंडों से आधी ही होने के कारण इस संकरी टू वे सड़क पर दिन भर चूना पत्थर, चूना कली और ट्रेलर तेज गति से गुजरते हैं तो लोगों को उनके लिए रास्ता छोड़कर एक तरफ खड़ा होना पड़ता है। जबकि इस मार्ग के दोनों ओर एक किलोमीटर की दूरी में दुकानें ही दुकानें हैं। ऐसे में यहां दिन में कई बार जाम लग जाता है तो कई बार लोगों को दुर्घटनाओं का शिकार भी होना पड़ता है।

दुकानदार भी कोई कम नहीं
मुख्य बस स्टैंड से सोजती गेट तक के मेगा हाइवे के दोनों और बाजार है, तथा दोनों और के दुकानदारों का भी आवागमन की इस दुविधा को कम करने के बजाय बढ़ाने में ही सहयोग रहता है। दुकानदार दुकान के सामने बने नगरपालिका के नाले और नाले से आगे तक अपना सामान फैला देते हैं। इससे भी इस मेगा हाइवे की चौड़ाई और कम हो जाती है और आने-जाने वाले वाहनों एवं पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रिंग रोड ही है विकल्प
बिलाड़ा कस्बे की बढ़ रही आबादी, बढ़ते दुकानदारों की संख्या एवं बढ़ते आवागमन, तथा वाहनों के दबाव से मुक्त करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने खारिया मीठापुर से सीधा बरना होकर गुजर रहे मेगा मार्ग को जोडऩे के लिए एक योजना सोच रखी है, लेकिन इस रिंग रोड को व्यावहारिक रूप दिया जाए । इसके लिए न तो मौके पर सर्वे हुआ है और ना ही इसके लिए कार्य योजना की डीपीआर तैयार की गई है, जबकि बिलाड़ा कस्बे को वर्तमान में रिंग रोड की सख्त दरकार है।


इनका कहना है
बिलाड़ा कस्बे से गुजर रहे मेगा हाइवे को वाहनों के बढ़ते दबाव से मुक्त करने के लिए रिंग रोड ही विकल्प है। यह रिंग रोड खारिया मीठापुर से उनके विभाग द्वारा बनाई हुई सिंगल रोड जो बरना की ओर जाती है, उसे ही डबल रोड बना कर मेगा हाइवे का स्वरूप दिया जा सकता है।
-नारायण लाल चोयल, सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग बिलाड़ा



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