जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से संबद्ध एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में इसी शैक्षणिक सत्र से खोले गए नए पेट्रोलियम विभाग के विभागाध्यक्ष को विवि ने 2 महीने में ही बदल दिया। अब विभागाध्यक्ष का कार्यभार कॉलेज के डीन को सौंपा गया है।
राज्य सरकार ने पचपदरा में रिफाइनरी को देखते हुए फरवरी 2020 में 20 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत करके एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में पेट्रोलियम विभाग खोलने को मंजूरी दी थी और हाल ही में सरकार ने कॉलेज को विश्वविद्यालय में अपग्रेड करने पर भी मुहर लगा दी। एमबीएम को विश्वविद्यालय का दर्जा भी रिफाइनरी को ध्यान में रखते हुए दिया जा रहा है जबकि विवि प्रशासन पेट्रोलियम विभाग को भी गंभीरता से नहीं ले रहा।
विभाग में शिक्षक सहित अन्य आधारभूत सुविधाएं नहीं
वर्तमान में पेट्रोलियम विभाग की 60 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संपन्न हो गई है। बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष के छात्रों का पाठ्यक्रम समान होता है। इसलिए पेट्रोलियम इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष के छात्रों को अन्य छात्रों की तरह सामान्य इंजीनियरिंग पढ़ाई जाएगी, लेकिन अगले साल पेट्रोलियम इंजीनियरिंग पढ़ाने के लिए शिक्षकों की आवश्यकता होगी। वर्तमान में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग पढ़ाने के लिए अलग से शिक्षक, अन्य कर्मचारी और आधारभूत सुविधाएं मौजूद नहीं है।
एसोसिएट प्रोफेसर को एचओडी बनाने से थे नाराज
विवि प्रशासन ने करीब 2 महीने पहले केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर अनिल व्यास को विभाग अध्यक्ष नियुक्त किया था। इंजीनियरिंग के शिक्षकों का कहना है कि पेट्रोलियम विभाग में मेकेनिकल, माइनिंग और सिविल विभाग की भूमिका मुख्य होती है। साथ ही वरिष्ठ शिक्षक को एचओडी नहीं बनाने पर भी अन्य शिक्षक नाराज थे। अब कॉलेज डीन प्रोफेसर सुनील शर्मा को एचओडी का कार्यभार सौंपा गया है। प्रोफेसर शर्मा की सहायता के लिए कॉलेज के प्रोफेसरों की एक कमेटी भी गठित की जाएगी ताकि पेट्रोलियम विभाग का संचालन आसानी से किया जा सके।
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