जोधपुर।
कोविड-19 व चीन के साथ गलवान विवाद के चलते जीरे का निर्यात प्रभावित हुआ था। वहीं गत सीजन मे खड़ी फ सल पर बरसात से जीरे की गुणवत्ता में आई कमी से फ सल निर्यात में दिक्कतों का सामाना करना पड़ा था। ऐसे में भारत के वाणिज्य मंत्रालय की निर्यात प्रोत्साहन योजना से निर्यात को कुछ गति मिली थी लेकिन योजना कि अवधि 31 दिसम्बर यानि गुरुवार को खत्म हो रही है। पश्चिमी राजस्थान में जीरे की बंपर बुवाई व कोरोना काल में निर्यात प्रभावित होने के चलते आगामी सीजन में किसानों को फ सल के सही दाम मिले। इसके लिए भारतीय किसान संघ ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी से जीरे के निर्यात की प्रोत्साहन योजना की अवधि को बढ़ाने की मांग की है।संगठन के प्रांत प्रचार प्रमुख तुलछाराम सिंवर ने बताया कि निर्यात प्रोत्साहन योजना की अवधि बढ़ाकर जीरे के निर्यात को और बढ़ावा दिया जाए। निर्यात बढऩे से गत सीजन का स्टॉक जितना कम फ ॉरवर्ड होगा, उतनी ही आने वाली फ सल के किसानों को उचित दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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गलवान विवाद से पहले बम्पर निर्यात
चीन को गलवान विवाद से एक सप्ताह पहले तक जीरे का निर्यात काफ ी अच्छा हो रहा था। गत वर्ष की अंतिम तिमाही तक भारतीय जीरा चीनी बाजार में खूब पसंद किया जा रहा था। चीन और बांग्लादेश में भारतीय बंदरगाहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याओं के बावजूद बड़ी मात्रा में जीरे की खरीद हुई थी। मगर गलवान विवाद के बाद इसमें 10 से 20 फ ीसदी तक की कमी आई। हालांकि इससे पिछले साल के उलट निर्यात मांग से कीमतों में इजाफ ा नहीं हुआ क्योंकि फ सल के समय भारी बारिश के कारण अच्छी गुणवत्ता वाले जीरे का भंडार कम थे।
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जीरा बुवाई रकबा रबी सीजन 2020-21 (रकबा हैक्टेयर में)
जिला -- बुवाई रकबा
जोधपुर -- 187000
बाड़मेर -- 215000
जालोर -- 90000
जैसलमेर -- 60000
नागौर -- 50000
सिरोही -- 15000
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कुल -- 607000
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