जोधपुर. जोधपुर सेन्ट्रल जेल के बंदियों को लॉक डाउन के बाद से कोर्ट में पेशी पर लाने ले जाने की सुविधा फिर शुरू हो गई, लेकिन चालानी गार्ड की समुचित उपलब्धता के चलते बंदियों को चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। यही वजह है कि गत दिनों एक हार्डकोर को इलाज करवाने की जगह एक माह की पैरोल मिल गई। जेल विकास बोर्ड की राज्य स्तरीय कमेटी की सदस्य गीता बरवड़ के जेल निरीक्षण के दौरान भी यह मुद्दा सामने आया।
चुनावी व्यस्तता के चलते नहीं मिल पाए गार्ड
जेल सूत्रों की मानें तो कोरोना की वजह से कोर्ट में लम्बे समय तक बंदियों की पेशी नहीं हुई थी। जिसकी वजह से गार्ड नहीं ली जा रही थी। अब पेशी होने लगी है तो बंदियों को कोर्ट लाना ले जाना शुरू किया गया है। कुछ बंदियों के स्वास्थ्य की जांच बाहर करवाई जानी हैं, लेकिन पुलिस के पंचायत व नगर निगम चुनाव में पुलिस की व्यस्तता के कारण चालानी गार्ड के अभाव में यह संभव नहीं हो पाया था। चुनाव सम्पन्न होने के साथ ही अब गार्ड मिलने लगी है।
गंभीर बीमारी वाले बंदियों की करवाई जाती है जांच
जोधपुर सेन्ट्रल जेल में एक हजार से अधिक बंदी व कैदी हैं। इनके स्वास्थ्य की सुविधा के लिए जेल में डिस्पेंसरी है, लेकिन गंभीर बीमार होने पर इन्हें महात्मा गांधी अस्पताल अथवा मथुरादास माथुर अस्पताल या अन्य किसी अस्पताल में जांच के लिए ले जाया जाता है। इन्हें लाने ले जाने व सुरक्षा के लिए पुलिस लाइन से चालानी गार्ड उपलब्ध करवाई जाती है।
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