जोधपुर। सूचना का अधिकार कानून के तहत अब कोई भी पत्नी अपने पति की वार्षिक सकल आय जान सकती है। केन्द्रीय सूचना आयोग ने एक अहम आदेश में आरटीआई के तहत पत्नी को अपने पति की सकल आय जानने का हकदार माना है। आयोग ने साफ कर दिया कि ऐसी सूचना अधिनियम के तहत सूचना प्रकट करने से छूट की श्रेणी में नहीं आती।
केन्द्रीय सूचना आयुक्त नीरज कुमार गुप्ता ने आयकर विभाग जोधपुर के केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के विनिश्चय को विधिसम्मत नहीं मानते हुए 15 कार्य दिवस में अपीलार्थी पत्नी को उसके पति की सकल आय और कर योग्य आय का विवरण उपलब्ध करवाने के आदेश दिए। ऑडियो कॉल से हुई सुनवाई में अपीलार्थी जोधपुर निवासी रहमत बानो की ओर से पैरवी करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजाक के. हैदर ने कहा कि अपीलार्थी ने आरटीआई के तहत पति के आयकर रिटर्न की प्रति चाही थी। जवाब में आयकर विभाग जोधपुर के केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी ने कहा कि चाही गई सूचनाओं का सम्बन्ध तृतीय पक्षकार से होने से नोटिस दिया गया। तृतीय पक्षकार ने अपनी निजी सूचनाएं उपलब्ध करवाने पर असहमति दी है। ऐसे में अधिनियम की धारा 8 (1) (जे) के तहत सूचनाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के विनिश्चय को सही ठहराते हुए अपील नामंजूर कर दी।
हैदर ने आयोग को बताया कि अपीलार्थी और उसके पति के बीच आपसी विवाद के कारण पत्नी ने जोधपुर के सक्षम न्यायालय में भरण पोषण के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर रखा है। केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी का विनिश्चय अपीलार्थी के भरण पोषण के अधिकार के सही निर्धारण में बाधक बन रहा है। उन्होंने दलील दी कि किसी भी कानूनी प्रावधान को इस प्रकार से व्याख्यायित नहीं किया जा सकता कि वह किसी अन्य कानून के तहत उपलब्ध उपचार को अर्जित करने की संभावना को समाप्त कर दे।
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