नौसर. जोधपुर जिले के नौसर गांव का एक किसान पिछले पांच साल से जैविक खेती करते हुए विभिन्न नवाचार के साथ कुछ नया करने की योजना से मेहनत करने में लगा है। दृढ इच्छा शक्ति से उसे सफलता भी मिली है। पहले काले गेहूं की फसल ली और अब जैविक खेती के रूप में सफेद शकरकंद उगाने में सफलता प्राप्त की है।
नौसर के प्रगतिशील जैविक किसान के रूप में पहचाने जाने वाले रावलचंद पंचारिया ने अपने खेत में तीन बीघा सफेद शकरकंद की फसल बोई। फसल की आकृति, रंग व गुणवत्ता खोदकर देखी तो पूर्णतया सफेद शकरकंद व करीब डेढ़ फीट लंबाई देखकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई।
पत्रिका से बातचीत में किसान पंचारिया ने बताया कि वह पिछले पांच साल से जैविक खेती कर रहा है। पंद्रह बीघा में लाल शकरकंद भी बोई हुई है। उन्होंने आत्मा, काजरी, आफरी, पशुपालन, केवीके, कृषि विश्वविद्यालय आदि संस्थानों के विशेषज्ञों की समय-समय पर सलाह लेकर वैज्ञानिक तरीके अपानाए।
कृषि विशेषज्ञ भी कर रहे सराहना कृषि विशेषज्ञों ने भी इनके कृषि फार्म पर लगाए गए विभिन्न इकाइयों के माध्यम से जैविक खेती करने के तरीके से क्षेत्र के कई किसानों का मनोबल बढऩे की बात कही। कृषि विज्ञान केन्द्र फलोदी के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ.सेवाराम कुमावत ने बताया कि जोधपुर जिले में ये सबसे अच्छा काम कर रहे हैं। आत्मा के तहत जिले का बेस्ट किसान अवार्ड भी मिला है।
आमतौर पर यह फसल दिसंबर-जनवरी में पककर बाजार में आती है। किसान पंचारिया ने बताया कि नवाचार में सफलता पर खुशी है। जल्द ही उनकी यह उपज बाजार में उपलब्ध होगी।
इनका कहना है
वैज्ञानिकों की ओर से किया गया नवाचार लेबोरेट्री में रखा जाता है। लेकिन इन्होंने सलेक्शन कर आम किसान के बीच उपयोगिता साबित की है। शकरकंद उगाना चाहने वाले सभी किसान इनसे प्रेरणा लेकर खुद भी उगाए तो ज्यादा अच्छा रहेगा। तभी सार्थकता सिद्ध होगी।
-डॉ.सेवाराम कुमावत, वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र फलोदी।
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