कोरोना की अनिश्चितता के कारण दिमाग पर पड़ रहा विपरीत प्रभाव

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?


जोधपुर. मनोचिकित्सा विभाग एम्स की ओर से मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना महामारी से जुड़ी हुई समस्याओं पर व्याख्यान व पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया। व्याख्यान में डॉ मुकेश स्वामी ने कोरोना महामारी के दौरान आम जनता, कोरोना से पीडि़त मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों में होने वाले मानसिक प्रभावों और उपायों के बारे में जानकारी दी । मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पडऩे का प्रमुख कारण दिनचर्या का अस्त व्यस्त होना, आय पर विपरीत प्रभाव और कोरोना से जुड़ी अनिश्चितता है । ऐसे समय में यदि व्यक्ति होने वाली विभिन्न संभावनाओं को मन में रखकर भविष्य के बारे में सोचे तो संभावित मानसिक दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है । पैनल डिस्कशन का परिनियमन एम्स के डीन एकेडमिक डॉ कुलदीप सिंह ने किया और पनेलिस्ट डॉ नरेश नेभिनानी,डॉ प्रतिभा और डॉ नवरतन सुथार ने विभिन्न पहलूओं पर विचार रखे। बच्चों के अभिभावकों के लिए पेरेंटिंग विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 200 अभिभावकों ने भाग लिया।

डॉ नरेश ने बताया कि इस समय केवल उन बातों पर ध्यान केन्द्रित करें जो आपके नियंत्रण में हैं। यह तनाव वो कम करने में कारगर हैं । डॉ नवरतन सुथार ने नशे के रोगियों में नशे के दुष्प्रभावों पर ध्यान केन्द्रित किया। उन्होंने बताया कि नशा प्रयोग करने वालों में कोरोना से गंभीर परेशानी अधिक होती है । डॉ प्रतिभा ने बच्चों में बिहेवीयर एडिक्शन से बचने के तरीकों के बारे में बताया । डॉ शिवाल ने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया। डॉ प्रतिभा ने पेरेंटिंग के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि आजकल के तनावपूर्ण माहौल में पेरेंटिंग की जिम्मेदारियों को निभाना बहुत चुनौतीपूर्ण है । उन्होने पेरेंटिंग के अलग अलग तरीको के बारे में बताया की किस तरह संतुलित तरीके अपनाने चाहिए । पेरेंट्स बच्चों के लिए रोल मोडेल का काम करते हैं इसलिए जो गुण हम बच्चों में देखना चाहते हैं वही अपने व्यवहार में डालना जरूरी है । क्लिनिकल साइकोलोजीस्ट डॉ तनु गुप्ता ने कोरोना महमारी के दौरान पेरेंटिंग में आने वाली चुनौतियों के बारे में बात की । कोरोना के चलते स्कूल बंद होने और ऑनलाइन क्लाससेस के कार्न पैरेंट्स में तनाव और काम का दबाव बढ़ गया है । कुछ बच्चे डर, चिंता, व सामाजिक अलगाव का भी सामना कर रहें है । ऐसे में उनके मन में बहुत असमंजस की स्थिति बनती है और सवाल उठते हैं। जिनका जवाब अनिश्चितता की स्थिति में पैरेंट्स भी नहीं दे पाते है । बच्चों को अधिक समय देने की जरूरत और काम के दबाव की वजह से पैरेंट्स में हो रही मानसिक परेशानियों को पहचानना जरूरी है।
चाइल्ड साइकोलोजीस्ट एमएस हलीमुनिस्सा ने बताया कि विश्वभर में रिसर्च से पता चला है की माहमारी के कारण देखभाल करने वाले और बच्चे दोनों प्रभावित हुए हैं । सबकी ये ही चिंता है कि लॉकडाउन के कारण बच्चों पर पड़े दुष्प्रभाव से बाद की जिंदगी में कितना बुरा असर होगा । इसके लिए डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने अभिभावकों के लिए कुछ सुझाव दिए है। खुद के लिए और बच्चे के लिए एक दिनचर्या तैयार करें। बच्चों से खुल कर कोरोना के बारे में बात करें व सही जानकारी दें ।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3iIgRnl
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment