जोधपुर. मंडोर क्षेत्र के आंगणवा स्थित गुरु कृपा मानसिक विमंदित गृह के 135 विशेष दिव्यांग अनाथ बच्चों के लिए सरकारी मदद कम होने के साथ लॉकडाउन के बाद दानदाताओं ने भी मुंह फेर रखा है। दिमागी रूप से पूर्ण बीमार विमंदित गृह के 135 विशेष दिव्यांग परिवार पर हर साल करीब 67 लाख रुपए खर्च होते है लेकिन राज्य सरकार सिर्फ 48 लाख का ही अनुदान मिलता है। लेकिन इस बार पिछले साल के अनुदान का 25 प्रतिशत 12 लाख ही मिल सका है। ऐसे में बच्चों को कई तरह की आवश्यक वस्तुएं की पूर्ति करने वाले भामाशाह व दानदाता भी लॉकडाउन के बाद पहुंचना कम हो चुके है। अपनों से तिरस्कृत और प्रकृति के कोपभाषित करीब विशेष बच्चे ना तो किसी के समक्ष अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते है और ना ही अपनी आवश्यकताओं और परेशानियों के बारे में किसी को बता या समझा सकते है।
विमंदित बच्चों की सार संभाल चुनौति
विमंदित गृह की संचालक सुशीला बोहरा ने बताया कि संस्था की बालक बालिकाएं की नियमित देखभाल के लिए अलग अलग शिफ्ट में कुल 40 महिला और पुरुषों को अलग अलग वार्ड के लिए तैनात किया गया है। किशोर विमंदित बालिकाओं की पीरियड्स में सार संभाल किसी बड़ी चुनौति से कम नहीं है। राज्य सरकार को विमंदित गृह के कर्मचारियों का नाम मात्र पारिश्रमिक बढ़ाने की जरूरत है।
रोजाना एमडीएम लाने-लेजाने की परेशानी कम हो
केन्द्र के अधिकांश बच्चे न्यूरोलॉजी व ग्रेस्ट्रोलोजी से पीडि़त है लेकिन केन्द्र में आपात स्थिति और नियमित जांच के लिए स्थाई चिकित्सक व्यवस्था नहीं है। प्रभारी जगदीश चौधरी ने बताया कि केन्द्र की अभी तक सुरक्षा दीवार तक नहीं बनी है। क्षेत्र के समाजसेवी लक्ष्मण सिंह सोलंकी ने मुख्यमंत्री से विमंदित गृह के बच्चों की सुविधा के लिए नयापुरा मंडोर सेटेलाइट अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति करने की मांग की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि सर्दी के मौसम और कोरोनाकाल में विमंदित बच्चों को नियमित रूप से एमडीएम तक लाने ले जाने की परेशानी कम करने के लिए नजदीकी अस्पताल में सुविधा होनी चाहिए।
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