जोधपुर . कायलाना के पास करीब 32.43 करोड़ की लागत से निर्मित माचिया जैविक उद्यान में लगातार घटते वन्यजीवों के आकर्षण और दर्शक सुविधाओं में कमी से पर्यटकों की संख्या भी लगातार कम हो रही है। माचिया उद्यान में देशी विदेशी दर्शकों को वन और वन्यजीवों के दुर्लभ संसार से रूबरू करवाने के लिए बनाए गए प्रकृति निर्वचन केन्द्र (नेचर इन्टरप्रीटिशन सेन्टर) में अभी तक पूरी सुविधाएं दर्शकों को नहीं मिल रही है। इस केन्द्र में पूरे विश्व के वनों और वन्यजीवों की पारिस्थितिकी, राजस्थान के थार मरुस्थल इलाकों में पाए जाने वाले वन्यजीव, मरु वनों का महत्व और वन तथा पर्यावरण से जुड़ी सामग्री को प्रदर्शित करना था लेकिन दर्शक आज भी वन्यजीवों के दुर्लभ संसार से वंचित है।
धूल फांक रहा वातानुकूलित सभागार
प्रकृति निर्वचन केन्द्र के वातानुकूलित सभागार में करीब 120 दर्शकों के लिए तीन मीटर चौड़े व लंबाई वाले स्क्रीन पर वन्यजीवों से जुड़ी विश्वस्तरीय फिल्मों का प्रदर्शन भी पिछले चार साल में नहीं हो पाया है। केन्द्र के एक कक्ष में थार के दुर्लभ वन्यजीवों के प्रदर्शित चित्र भी फीके पडऩे लगे है। जोधपुर के वन्यजीव प्रभाग के स्टोर रूम में दशकों से धूल फांक रही दुर्लभ 17 वन्यजीवों की ट्राफियों को नेचर इन्टरप्रीटिशन सेन्टर में प्रदर्शित करने की योजना भी कागजों में अटकी है।
पक्षियों का संसार भी खत्म
माचिया परियोजना फेज-2 को लंबे अर्से से मंजूरी नहीं मिलने से माचिया जैविक उद्यान में पक्षियों को अस्थाई पिंजरों में रखा जा रहा है। सीजेडए के मापदंड व निर्देशानुसार पक्षी कक्ष नहीं होने से पेलिकन्स, ऐमू, राजहंस, पहाड़ी तोते, तीतर, कुरजां, कॉमन कूट लव बड्र्स सहित कई पक्षियों की मौत तक हो चुकी है।
कैम्पा से मांगा है फंड
माचिया में पक्षी कक्ष (वॉक-इन एवेरी) एन्क्लोजर्स के लिए कैम्पा, वन विभाग मुख्यालय मंजूरी के लिए भेज रखा है। प्रकृति निर्वचन केन्द्र की कमियों को जल्द ही दूर किया जाएगा। दर्शकों को जल्द ही हर आधे घंटे बाद वन्यजीवों पर आधारित फिल्में दिखाई जाएगी।
केके व्यास, सहायक वन संरक्षक वन्यजीव जोधपुर.
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