जोधपुर. पाकिस्तान में प्रताडि़त हुए तो करीब 16 साल पहले परिवार के साथ सबकुछ छोडक़र भारत आ गए। शादी हुए भी 12 साल से ज्यादा समय हो गया। अब तो बच्चे भी बड़े हो गए। लेकिन भारतीय नागरिकता मिलने का इन्तजार हैं कि खत्म नहीं हो रहा। सच कहे तो अब तो ऐसा लगता है कि इस जीवन में तो हमें शायद ही भारतीय होने का गौरव मिलेगा। यह कहना है 36 वर्षीय करीमा भील व उनकी बहन माया का। करीमा ने बताया कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सांगण में परिवार सहित रहते थे। वहां से प्रताडि़त होकर पिता गोधुराम पूरे परिवार को वर्ष 2004 में भारत लेकर आ गए, यहां जोधपुर में रहे। पिताजी व भाई को भारतीय नागरिकता के लिए सरकारी दफ्तरों के सैकड़ों चक्कर काटते देखा। हम दोनों बहनें बड़ी हुई तो पिता ने मेरी शादी जैसलमेर के रमेश भील व छोटी बहन माया की शादी जैसलमेर के ही चंद्रप्रकाश भील से कर दी। जैसलमेर के बबर मगरा में दो बहनें परिवार सहित रहती है। शादी के बाद मेरे चार व छोटी बहन माया के दो बच्चे हुए। जो स्कूल जाने लग गए है लेकिन हम दोनों बहनों को 16 साल बाद भी भारतीय नागरिकता मिलने का अभी भी इन्तजार है।
अपहरण न हो जाए इसलिए पिताजी ने कभी स्कूल नहीं भेजा
पाकिस्तान में माहौल ऐसा था कि पिता गोदूराम को हम बहनों के अपहरण होने का डर हमेशा बना रहता था। इसलिए कभी स्कूल नहीं भेजा। इसके चलते दोनों बहनें अनपढ़ रह गई। लेकिन हमारा सपना हैं कि हम अपने बच्चों को उच्च शिक्षित कर सरकारी नौकरी करता देखे।
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