जोधपुर. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनटीए) की ओर से मेडिकल सहित अन्य पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश परीक्षा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट-2020) का आयोजन रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। अभिभावकों और छात्र छात्राओं ने परीक्षा केंद्रों पर सोशियल डिस्टेंसिंग, सेनेटाइजिंग, सेफ्टी सीटिंग (एक कक्ष में केवल १२ परीक्षार्थी) और टीचर्स बिहेवियर की तारीफ की।
जोधपुर में ९० प्रतिशत उपस्थिति रही। शहर के ३६ परीक्षा केंद्रों पर १२ हजार से अधिक परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा दोपहर २ बजे से शाम ५ बजे तक रही। पहले यह परीक्षा मई में होनी थी लेकिन कोरोना के कारण इसमें चार महीने की देरी हुई। परीक्षा केंद्र से बाहर निकले छात्र छात्राओं ने बताया कि फिजिक्स का पार्ट कठिन रहा। इसमें कठिन व अधिक समय लगने वाले प्रश्न पूछे गए। केमेस्ट्री पिछले साल की तुलना में आसान रही। बायोलॉजी औसत रही लेकिन इसमें सीधे प्रश्नों की जगह घूमाकर सवाल किए गए।
चार बैच में प्रवेश, आधे घंटे तक तलाशी
सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों को पौन घण्टे पहले प्रवेश दिया जाएगा। समस्त परीक्षार्थियों को चार बैच में बांटा गया था। सभी का रिपोर्टिंग टाइम अलग-अलग था। सुबह ११ बजे से दोपहर १.३० बजे तक परीक्षाार्थियों को प्रवेश मिला। सभी परीक्षा केंद्रों पर निश्चित दूरी पर गोले व मार्क लगाए हुए थे। परीक्षा केंद्रों पर किसी भी तरह की भीड़ जमा नहीं हुई। प्रत्येक परीक्षार्थी के प्रवेश व उसकी तलाशी लेने में करीब आधे घण्टे का समय लग गया। परीक्षा समाप्त होने के बाद भी एक-एक कक्ष करके परीक्षार्थियों को बाहर निकाला गया लेकिन बाहर मुख्य रोड पर आते ही अभिभावकों व सिटी बसों में बैठने के लिए भीड़ जमा हो गई।
बगैर पानी की बोतलें आए, परीक्षा केंद्रों ने की व्यवस्था
एनटीए ने परीक्षार्थियों को अपने साथ पारदर्शी पानी की बोतल लाने के निर्देश दिए थे लेकिन कई परीक्षार्थी खाली हाथ आ गए। जिनको ११-१२ बजे प्रवेश दिया, उनके लिए बगैर पानी के चार-पांच घण्टे निकालने मुश्किल थे। एेसे में परीक्षा केंद्रों ने स्वयं पैकेज्ड पानी की बोतलें मंगाकर परीक्षार्थियों को दी। परीक्षा केंद्र पर मास्क व पैन भी दिया गया। मास्क को परीक्षा खत्म होते ही वहां डस्टबिन में डाला गया।
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