जोधपुर. पिछले तीन-चार दिनों से जोधपुर जिले की 250 से अधिक राशन की दुकानों पर पोस मशीनों में सैंकड़ों क्विंटल गेहूं और चना आवंटन देखकर राशन डीलर्स के होश फाख्ता हो गए। भौतिक रूप से गेहूं व चने की प्राप्ति के बगैर खाते में माल की एंट्री हो गई। राशन डीलर्स को न तो रसद विभाग और न ही राजस्थान राज्य खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम संतोषजनक जवाब दे पा रहा है। डीलर्स को आशंका है कि अक्टूबर का गेहूं इसमें से कटौती करके आएगा, जबकि यह गेहूं-चना वास्तविक रूप से उनके पास पहुंचा ही नहीं है। ऐसे में एक तो अगले महीने उपभोक्ताओं को बांटने के लिए उनके पास गेहूं नहीं रहेगा, दूसरा माल की कमी बताकर उन पर प्रकरण भी बनाया जा सकता है।
हकीकत यह है
जिले में राशन की 1217 दुकानें हैं। कोरोना काल के दौरान श्रमिकों के पलायन करने पर केंद्र व राज्य सरकारों ने इन्हें प्रवासी मानकर इनके लिए राशन की दुकानों पर गेहंू व चने की व्यवस्था की। जोधपुर में इस समय 3.65 लाख प्रवासी है। पिछले छह महीने में सरकार ने सभी दुकानों पर प्रवासियों के लिए गेहूं-चना आवंटित किया। कई जगह प्रवासी कम पहुंचने के कारण वहां गेहूं-चना सरपल्स पड़ा है। राज्य सरकार ने सरप्लस गेहंू व चने को जिले में ही अन्य राशन डीलर्स को ऑनलाइन आवंटित कर दिया, जबकि वास्तविक रूप से उनके पास गेहूं-चना पहुंचा ही नहीं है। सामान्यत: हर महीने पहले माल की डिलिवरी होती है। उसी के साथ ओटीपी के जरिए पोस मशीन में गेहूं आवंटित हो जाता है।
अब केवल एक वार्ड में एक दुकान
नए नियम के मुताबिक प्रवासियों को गेहूं-चना वितरण के लिए एक वार्ड में केवल एक ही दुकान रहेगी। गांवों में ग्राम पंचायत की एक ही दुकान पर प्रवासियों को राशन मिलेगा।
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एक दुकान से दूसरी दुकान गेहूं कैसे पहुंचेगा, दोनों विभाग आमने-सामने
‘हमारा काम केवल एफसीआई से राशन की दुकानों तक गेहूं पहुंचाना है। एक दुकान से दूसरी दुकान गेहूं पहुंचाने की व्यवस्था रसद विभाग खुद करेगा।’
- राजेश पंवार, प्रबंधक, नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम जोधपुर
‘खाद्य आपूर्ति निगम इस गेहूं को पहुंचायेगा। ऐसा नहीं होता है तो अन्य व्यवस्था देखते हैं।’
- राधेश्याम डेलू, जिला रसद अधिकारी जोधपुर
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