जोधपुर. विदेशी मेहमानों से गुलजार रहने वाले शहर के भीतरी भाग में स्थिति गेस्ट हाउस कोरोना के चलते पिछले छह माह से अधिक समय से सूने पड़े है। आलम यह है कि आमदानी नहीं होने से संचालकों को गेस्ट हाउस का रख-रखाव, लाइट-पानी के बिल भरना तक भारी पड़ रहा है। जिसके चलते अधिकतर ने स्टॉफ तक कम कर दिया। गेस्ट हाउस संचालकों का कहना है कि कुछ माह तक ऐसी ही स्थिति रही तो घर खर्च चलाना भी उनके लिए मुशिकल हो जाएगा।
किले के निकट आबाद जोधपुर के पुराने शहर की अधिकतर गलियां संकरी है। इन संकरी गलियों में जोधपुर की पुरानी संस्कृति देखने को मिलती है। जिसके चलते विदेशी मेहमान भीतरी शहर में संचालित होने वाले गेस्ट हाउस में रूकना तथा भीतरी शहर की गलियों में घूम कर वहां की संस्कृति से रूबरू होना पसंद करते है। ऐसे में भीतरी शहर के गेस्ट हाउस विदेशी मेहमानों से गुलजार रहते थे जिससे गेस्ट हाउस संचालकों की आजीविका चलती थी। लेकिन कोरोना के चलते मार्च माह से गेस्ट हाउस सूने पड़े है। भीतरी शहर में 80 के करीब गेस्ट हाउस संचालित हो रहे है।
बिजली के बिलों में मिले छूट
मार्च माह से गेस्ट हाउस सूने पड़े है। लेकिन बिजली के बिल अघरेलू आ रहे है। आमदानी हो नहीं रही। ऐसे में बिजली का बिल भरने व गेस्ट हाउस का रख-रखाव भी भारी पड़ रहा है। सरकार से हमारी मांग है कि कोरोना काल के दौरान बिजली बिल की राशि घरेलू के हिसाब से लेकर कुछ राहत दे।
- पूनमचंद गौड, अध्यक्ष, जोधपुर गेस्ट हाउस एसोसिएशन
आमदानी नहीं तो स्टॉफ कैसे दे तनख्वाह
पिछले छह माह से अधिक समय से गेस्ट हाउस सूने पड़े है। आमदानी हो नहीं रही। ऐसे में स्टॉफ तक कम करना पड़ा। आलम यह है कि गेस्ट हाउस का रख-रखाव तक भारी पड़ रहा है।
- जाफरान सैय्यद, उपाध्यक्ष, जोधपुर गेस्ट हाउस एसोसिएशन
बिना ब्याज मिले ऋण
पिछले छह माह से अधिक समय से आमदानी हो नहीं रही। गेस्ट हाउस में काम करने वाले कार्मिकों को तनख्वाह तक नहीं दे पा
- फिरासत अहमद, गेस्ट हाउस संचालक
करना पड़ रहा दूसरा काम
गेस्ट हाउस पिछले छह माह से सूना पड़ा है। घर खर्च चलाने के लिए कोई दूसरा काम देख रहा हूं। आखिर घर की गाड़ी भी तो चलानाी है न जाने गेस्ट हाउस में फिर से मेहमानों का पगफेरा कम होगा।
- कैलाश गौड, गेस्ट हाउस संचालक
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2YD2SYH
0 comments:
Post a Comment