बदहाली पर आंसू बहा रहा प्रदेश स्तरीय वनकर्मी प्रशिक्षण केन्द्र

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जोधपुर. प्रदेश के वनकर्मियों की कार्यक्षमता का विकास करने के लिए वन विभाग की ओर से जोधपुर में न्यू पाली रोड पर संचालित प्रदेश स्तरीय मरु वन प्रशिक्षण केन्द्र का भवन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। करीब 42 पूर्व 1978 में बने प्रदेश दूसरे सबसे बड़े प्रशिक्षण केंद्र में पिछले चार दशकों के दौरान ना तो भवन में और ना ही प्रबंधन में कोई सुधार आया है। नियमित मरम्मत के अभाव में प्रशिक्षण केन्द्र का भवन जर्जर होने के कगार पर है। केन्द्र में प्रशिक्षणार्थियों को इंडोर गेम्स सुविधा तो दूर नवीनतम प्रशिक्षण के उपकरण तक नहीं है। महिला प्रशिक्षकों के भी लंबे अर्से तक प्रशिक्षण के लिए ठहरने की कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। जर्जर भवन की छत भी बारिश में जगह जगह से टपकती है। कार्यबल भी स्वीकृत संख्या में नहीं होने से प्रशिक्षण का मूलभूत सिद्धांत भी प्रभावित हो रहा है। यहां तक उपवन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक, रेंजर प्रथम सहित कुल 14 स्वीकृत पदों में 8 पद रिक्त है। यही कारण है की वनकर्मियों का नियमित प्रशिक्षण अथवा रिफ्रेशर कोर्स नहीं हो पा रहा है। उल्लेखनीय है प्रदेश में वानिकी प्रशिक्षण संस्थान जयपुर के बाद वनकर्मियों के लिए जोधपुर में दूसरा बड़ा प्रशिक्षण केन्द्र माना जाता है।

प्रशिक्षण केन्द्र में किसका प्रशिक्षण

वनों पर बढ़ते दबाव का सफलतापूर्वक सामना करने, जन अपेक्षाओं में आ रहे परिवर्तन तथा वन एवं सामान्य प्रबन्धन विधियों में हो रहे नए प्रयोगों , नई सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी के उपयोग से परिचित रहते हुए वैज्ञानिक दृष्टि से वन प्रबन्धन के लिए वन कर्मचारियों को समय - समय पर विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण, रिफ्रेशर प्रशिक्षण दिया जाता है।

कोरोना के कारण स्थगित है प्रशिक्षण

कोरोना महामारी के चलते समस्त प्रशिक्षण राज्य सरकार एवं उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार स्थगित किए हुए हैं। डिजिटल फॉरेस्ट लर्निंग चैनल के माध्यम से ऑनलाइन, वन एवं वन्य जीवों के संबंध में विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

एनएस शेखावत, कार्यकारी डीसीएफ, मरु वानिकी प्रशिक्षण केन्द्र जोधपुर



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