जोधपुर. शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित भोगिशैल पहाडिय़ों में स्थित बैद्यनाथ महादेव मंदिर जोधपुर की स्थापना से 341 साल पूर्व का है। मारवाड़ की राजधानी रहे मंडोर में सरदार नाहर सिंह पडि़हार का शासन था। बैद्यनाथ मंदिर की स्थापना के बारे में कहा जाता है कि मारवाड़ रियासत काल के मंडोर के सरदार नाहर सिंह शिव के परम भक्त थे। एक बार उनके पुत्र की तबीयत बहुत खराब हो गई। राज चिकित्सक भी उपचार के लिए कहीं बाहर प्रवास पर थे। चिंतित मुद्रा में बैठे सरदार नाहर सिंह के पास उस समय एक सैनिक घुड़सवार सूचना लाया की पहाड़ी पर पेड़ के नीचे कोई बुजुर्ग वैद्य विराजे है । सरदार नाहर सिंह ने वैद्यजी को बुलाने में समय व्यर्थ गंवाने के बजाए अपने पुत्र को रथ में बैठाकर वैद्य के पास निकल पड़े और उपचार शुरू करवाया । कुछ ही देर में सरदार के पुत्र को आराम मिला। उन्होंने वैद्यराज को प्रणाम कर अपने साथ मंडोर चलने को कहा। लेकिन वहां से वे अंतध्र्यान हो गए। सरदार की समझ में आ गया कि साक्षात महादेव वैद्यराज बनकर यहां प्रकट हुए थे। इस घटना के बाद नाहरसिंह ने उसी जगह पर एक मंदिर विक्रम संवत 1176 में भाद्र मास की पूर्णिमा के दिन प्रतिष्ठित किया गया था ।
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