गुजरात में यह फॉर्मूला लागू हुआ, जोधपुर अभी रेस में काफी पीछे

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जोधपुर.
गुजरात के पांच शहरों में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गगनचुंबी इमारतों का फॉर्मूला लागू किया गया है। इसके तहत 70 मंजिल से भी अधिक की बहुमंजिला इमारतों को अनुमति दी जा सकेगी। वहां के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस संबंध में निर्णय किया। उनका उद्देश्य वर्टिकल डवलपमेंट करना और जमीन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना है। इधर, जोधपुर में इस परिपेक्ष्य में बात करें तो जो प्लानिंग गुजरात के शहरों में हुई है उसका आधा हिस्सा भी हमारे यहां नहीं है। जोधपुर में बमुश्किल तीन या चार इमारतें मिलेगी जो कि 20 मंजिल या इससे ज्यादा ऊंचाई रखती है।

यह है गुजरात फॉर्मूला
अहमदाबाद, गांधीनगर, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 70 मंजिला से भी ज्यादा की इमारतों को अनुमति देने की योजना बन रही है। डिजास्टर मैनेजमेंट और फायर जैसे महत्वपूर्ण बिन्दूओं पर रिपोर्ट तैयार होने के बाद इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाया जाएगा। इसका उददेश्य ज्यादा से ज्यादा जमीन का उपयोग करना है। वर्तमान में 23 से 25 मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति ही वहां दी जा रही है।

जोधपुर में 30 मीटर तक ही इजाजत

बिल्डिंग बायलॉज के हिसाब से जोधपुर में फिलहाल 40 से 50 मीटर तक की इमारत बन सकती है। लेकिन न्यायालय के आदेश के तहत फायर एनओसी महज 30 मीटर तक की इमारत को ही दी जा रही है। यानि 10 से 12 मंजिला इमारतों को ही अनुमति दी जा रही है।

60 मीटर की कुछ इमारतें
जोधपुर में सर्वाधिक ऊंचाई की इमारतें करीब 60 से 65 मीटर तक की है। यह भी अधिकांश आवासीय यानि कि फ्लैट योजनाएं हैं। 20 से 22 मंजिल की रहवासीय इमारतें फिलहाल बनी हुई है। यह भी सरकार से विशेष परिस्थितियों में अनुमति लेकर बनी है। लेकिन इससे ज्यादा ऊंचाई की इमारतों को वहां से भी अनुमति नहीं मिलती।

गुजरात का फायर सेफ्टी सिस्टम एडवांस

राजस्थान और खास तौर पर जोधपुर के मुकाबले गुजरात का फायर सेफ्टी सिस्टम काफी एडवांस हैं। जिन पांच शहरों में यह अनुमतियां जारी होगी वहां तो 100 मीटर से भी अधिक ऊंचाई की हाइड्रो मशीन व एडवांस तकनीक के उपकरण है। जिनसे आग पर काबू पाया जाता है। जोधपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बताते हैं यहां वर्तमान 40 मीटर तक ऊंचाई की इमारतों के लिए अग्निशमन वाहन है। क्षमता बढ़ाना प्रस्तावित है तो वह भी 50 से 60 मीटर तक ही होगा। ऐसे में गुजरात के फायर फाइटिंग सिस्टम की अपेक्षा हमारे यहां की व्यवस्था काफी पिछड़ी हुई है।



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