देशभक्ति के नारों से गूंजा जोधपुर का माचिया किला

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जोधपुर. कायलाना की पहाडिय़ों में स्थित माचिया किले में आजादी की जंग के दौरान 1942 में ब्रिटिश हुकूमत की अमानवीय यातनाएं सहने वाले मारवाड़ के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान जोधपुर की ओर से जंगे आजादी के महत्वपूर्ण स्मारक परिसर में देश भक्ति नारों के बीच तिरंगा फहराया गया। बारिश के बीच राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मघराज सिंघवी, आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान समिति जोधपुर के अध्यक्ष रामजी व्यास, राजस्थान हाइकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील जोशी, समाजसेवी राजेन्द्र बाहेती, तखत दान चारण, शारदा व्यास आदि ने सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए किला परिसर के स्वतंत्रता सेनानियों की याद में निर्मित कीर्ति स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित की और देशभक्ति नारे लगाए।


यह रहे थे माचिया किले में नजरबंद स्वतंत्रता सेनानी

दिसम्बर की भीषण सर्दी में जंगली सुअरो और वन्यजीवों के बीच किले में रखना किसी भयानक यातना से कम नहीं था। यातना सहने वालों में जंगे आजादी के सिपाही रणछोड़दास गट्टानी, राधाकृष्ण बोहरा तात, भंवरलाल सर्राफ, तारकप्रसाद व्यास, शांति प्रसाद व्यास , गणेशचन्द्र जोशी, मौलाना अतहर मोहम्मद, बालकृष्ण व्यास, पुरुषोत्तमदास नैयर, नरसिंगदास लूंकड़, हुकमराज मेहता, द्वारकादास पुरोहित, माधोप्रसाद व्यास, कालूराम मूंदड़ा, गोपाल मराठा, पुरुषोत्तम जोशी, मूलराज घेरवानी, गंगादास व्यास, हरिन्द्र कुमार शास्त्री, इन्द्रमल फोफलिया, छगनलाल पुरोहित, श्रीकृष्ण कल्ला, तुलसीदास राठी,(सभी जोधपुर ) शिवलाल दवे नागौर, देवकृष्ण थानवी, गोपाल प्रसाद पुरोहित, संपतलाल लूंकड़,सभी फलोदी, भंवरलाल सेवग पीपाड़, हरिभाई किंकर, मीठालाल त्रिवेदी सोजत, शांति प्रसाद व्यास, अचलेश्वर प्रसाद शर्मा मामा, बालमुकुंद बिस्सा, जोरावरमल बोड़ा आदि शामिल थे।



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