जोधपुर
22 अगस्त को गणेशोत्सव शुरू हो रहा है। कोरोना काल के चलते इस बार सार्वजनिक स्थानों पर भगवान श्रीगणेश के पांडाल नहीं सजेंगे। जिसके चलते बड़ी गणेश प्रतिमाएं की डिमांड न के बराबर है। घर-घर मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं स्थापित कर श्रद्धालु रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश की आराधना करेंगे। सार्वजनिक आयोजनों पर रोक के चलते इस बार बाजार में बड़ी गणेश प्रतिमाओं की डिमांड न के बराबर है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी लोगों में जागरूकता आई है। जिसके चलते इस बार पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने वाली मिट्टी से बनी छोटी गणेश प्रतिमाओं की खासी डिमांड है। शहरवासियों की डिमांड को देखते हुए घंटाघर गांचा बाजार में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं से कई दुकानें सजी हुई है। घर में विराजित की जाने वाली गणेश प्रतिमा को लेकर पंडित रमेशप्रकाश दवे का कहना है कि छह इंच से ज्यादा ऊंचाई की गणेश प्रतिमा घर में विराजित नहीं की जानी चाहिए। तथा मूर्ति ठोस होनी चाहिए और विसर्जन बहते पानी में किया जाना चाहिए। पोकरण से आती है भूरी मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएंखांडा फलसा कुमारिया कुंआ रहने वाले मूर्तिकार उमेश कुमार बताते है कि इस बार मिट्टी से बनी गणपति प्रतिमाएं डिमांड में है। वे काली मिट्टी से छोटे आकार की गणेश प्रतिमाएं बनाने का काम करते है। इस मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पर्यावरण अनुकुल है जो पानी में घुल जाती हैं। उन्होंने बताया कि भूरी मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं पोकरण से मंगवाते है।
अखबार से बनाए गणपति
खांडा फलसा कुमारिया कुंआ निवासी सुनिता प्रजापत ने बताया कि वह 9वीं कक्षा में पढ़ती है। इस बार वह भी गणपति प्रतिमा घर में विराजित करना चाहती है। इसलिए घर पर ही अखबार की लुगदी से उसने दो दिन की मेहनत से गणपति प्रतिमा बनाई। जो पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2Yrxr3z
0 comments:
Post a Comment