नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. चांदपोल के बाहर विद्याशाला-किला रोड स्थित सिद्धेश्वर गणेश मंदिर में 300 से भी अधिक साल प्राचीन है। मंदिर में स्थापित गणपति प्रतिमा की सूंढ दांयी तरफ है जिनके दर्शन शुभ माने जाते है। गणपति प्रतिमा का रंग भी काला चॉकलेटी है। गणपति प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा में है जिनकी उपासना करने से सर्वकार्य सिद्ध करने के साथ सर्व विघ्नों का नाश होता है। जोधपुर में दक्षिणामुखी गणपति प्रतिमा दर्शन कम ही मिलते है। मंदिर का करीब दो दशक पूर्व मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था। मंदिर में प्रत्येक बुधवार को भक्तों की भीड़ रहती है। गणेश चतुर्थी को मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते है। मंदिर से जुड़े बुजुर्ग परसराम जोशी ने बताया कि सिद्धेश्वर गणेश के हाथों में माला, नागपाश, फरसा और एकदंत और शीश पर मुकुट सर्प का पहने हुए है। मंदिर परिसर की तलहटी में गायत्री विद्यापीठ है। इतिहादविदों के अनुसार चांदपोल क्षेत्र में करीब 155 साल पहले विक्रम संवत 1921 में एक सर्वे के समय चांदपोल के बाहर गणपति मंदिरों में सिद्धेश्वर गणेश भी शामिल रहा है। उस समय चांदपोल के बाहर प्राचीन गणपति प्रतिमाओं में चांदपोल दरवाजे के पास, मुथा बुधमल के मंदिर, बोहरा शंकरराज की बगेची, माइदास मंदिर, अजबनाथ मंदिर, गणेश बाग, मीमावतों की बगेची, सेवगों की बगेची, नाइयों की बगेची, शिवबाड़ी, विद्याशाला के चबूतरे पर, विद्याशाला में, रामेश्वर मंदिर, रुघनाथ बावड़ी के ऊपर, माता के कुंड, नागरीदास अखाड़ा में, जागनाथ मंदिर, इकलिंग मंदिर, भूतेश्वर मंदिर सहित कुल 45 छोटे बड़े गणपति बप्पा के मंदिर विद्यमान थे। इन मंदिरों से कई गणपति की मूर्तियां आज भी विद्यमान है जिनका नियमित पूजन होता है।
एक हजार लड्डुओं का लगा भोग
सिध्देश्वर गणेश मंदिर मे इस बार गणेश चतुर्थी कोरोना महामारी के कारण सादगी से मनाया गया। प्रथम पूज्य को एक हजार एक लड्डूओ का भोग लगाया गया और विशेष प्रकार का श्रृंगार कर वैश्विक महामारी कोरोना की समाप्ति के लिए लिए प्रार्थना की गई।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3la8xzn
0 comments:
Post a Comment