LOCKDOWN--लॉक डाउन में नहीं बिके सब्जी, फल-फूल

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जोधपुर।

जिले में किसानों को लॉकडाउन के चलते फ रवरी-मार्च में बोई गई सब्जी व फूलों की फ सलों के दाम नहीं मिलने से सब्जियों को गौशालाओ में डालने व फूलों पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर होना पड़ा था। ऐसे में किसानों ने सब्जियों की नई पौध तैयार करने व फूलों की पुन: खेती में रुचि नही दिखाई थी। जिससे लंबे समय से सब्जी परिवहन पर अघोषित रोक टूटने व मांग निकलने के बावजूद सब्जियों की उपलब्धता कम हो गई और सब्जियों के दाम बढऩे लगे है।वहीं किसानो ने फूलों की नई खेती में रुचि नही दिखाई, लेकिन लंबी चलने वाली फूलों की फ सलों में धार्मिक आयोजनों व शादियों के कार्यक्रम सामान्य रुप से शुरू नहीं होने के कारण मांग नहीं निकलने से किसानों को ओने पौने दामों में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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लाखों रुपए का कर्जा लिया, हुआ नुकसान

सब्जी उत्पादक किसानों का कहना है कि लाखों रुपये का कर्ज लेकर सब्जियां बोई थी लेकिन सारा नुकसान हो गया। इस बार मौसम अनुकूल रहने से गोभी, पालक, बैंगन का अच्छा उत्पादन हुआ था लेकिन कोरोना महामारी के कारण न तो फ सलें अन्य जिलों में भेज पाए और न ही स्थानीय बाजार में बिकी।

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जिले में सब्जियों व फूलों की स्थिति

3 हजार हैक्टेयर में होता है सब्जियों का उत्पादन

20 हजार मीट्रिक टन सब्जियों का होता है उत्पादन

150 हैक्टेयर में होती है फूलों की खेती

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समर्थन मूल्य घोषित किया जाए

कोरोना से सब्जी व फू ल उत्पादक किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा, इसके लिए सरकार ने कोई सर्वे या आर्थिक सहायता नहीं दी। उल्टा विद्युत बिलों का अनुदान बंद कर दिया। ऐसे में किसान बड़ी लागत से होने वाली सब्जियों की बुवाई में रुचि कम दिखा रहे। सरकार को सब्जियों व फ लों का समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए।

ओमप्रकाश विश्नोई, जिला मंत्री

भारतीय किसान संघ

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