जोधपुर. भारतीय वायुसेना में शामिल हो रहे फ्रांस निर्मित लड़ाकू विमान रफाल का जोधपुर से पहला वास्ता पड़ा था। देश में पहली बार चार रफाल छह साल पहले जोधपुर की धरती पर ही उतरे थे। बुधवार को अंबाला पहुंच रही रफाल की पहली खेप की तरह ही ये विमान पेरिस से उडकऱ यूएई के डफर एयरबेस पर रुकने के बाद सीधे जोधपुर आए थे।
मौका था भारत-फ्रांस वायुसेनाओं के नियमित संयुक्त युद्धाभ्यास गरुड़ का। युद्धाभ्यास का पांचवा संस्करण जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर 3 से 13 जुलाई 2014 तक चला था। इस दौरान रफाल ने एयर टू एयर री-फीलिंग भी की थी। इसके लिए फ्रंास से सी-135 टैंकर आया था। युद्धाभ्यास में तत्कालीन भारतीय वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल अरुप राहा और फ्रांस के वायुसेनाध्यक्ष जनरल डेनिस मर्सियर ने भी रफाल व सुखोई-30 एमकेआई विमानों में उड़ान भरी थी। इसमें भाग लेने रफाल विमान पहली बार किसी भारतीय एयरबेस पर आए थे। इससे पहले रफाल बेंगलुरू एयरो इंडिया शो में प्रदर्शित किए गए थे।
पहले भी रुके थे डफर में
जोधपुर में आसमान साफ होने से एयर ऑपरेशन की आजादी रहती है, जबकि फ्रंास में फ्लाइंग के लिए कई क्लीयरेंस लेनी पड़ती है। इसके अलावा जून के समय जोधपुर में पारा 45 डिग्री तक पहुंच जाता है। गर्मी से निपटने के लिए फ्रांस वायुसेना का दल पिछली बार भी आबू धाबी से लगभग 32 किलोमीटर दूर संयुक्त अरब अमीरात के डफर वायुसेना स्टेशन पर रुका था। इस बार भारत के खरीदे रफाल भी डफर एयरबेस पर रुकने के बाद बुधवार को पहुंचेंगे।
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