जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान पशुपालन अधीनस्थ सेवा नियम-1977 के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता यदुवेन्द्रसिंह की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची पशुधन सहायक भर्ती प्रक्रिया में भाग ले चुका है और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विलंब से इस स्तर पर नियम की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता।
याची की ओर से नियम-19 के प्रथम परंतुक को चुनौती दी गई थी, जिसमें विभाग में अनुबंध पर पशुधन सहायक पद पर कार्य करने पर बोनस अंक देने का प्रावधान है। याची ने किसी अन्य विभाग में अनुबंध पर सेवाएं दी थी और इस आधार पर इस नियम की वैधता को चुनौती दी थी। अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल कुमार गौड़ ने कहा कि याची 14 मार्च, 2018 को राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड द्वारा विज्ञापित पशुधन सहायक भर्ती प्रक्रिया में भाग ले चुका है और उसे नियम की बारे में पूर्ण जानकारी थी।
याची ने कभी पशुपालन विभाग में अनुबंध पर काम नहीं किया। खंडपीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और याची ने किसी भी चयनित अभ्यर्थी को पक्षकार भी नहीं बनाया। इस स्तर पर विलंब से नियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
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