जोधपुर. जिले में किसान उत्साह के साथ खरीफ बुवाई में जुटे हैं। कृषि विभाग ने 12.50 लाख हेक्टेयर में बुवाई लक्ष्य निर्धारित किया है। क्षेत्र में बुवाई अंतिम चरण में है लेकिन बरसात में देरी व बदलती परिस्थितियों के अनुसार फ सल व विभिन्न किस्मों के चयन को लेकर किसानों को किसी प्रकार का तकनीकी सहयोग नहीं मिल रहा है। कृषि विभाग में सहायक कृषि अधिकारी के 44 व कृषि पर्यवेक्षकों के 248 सहित कुल २९२ पद स्वीकृत है। जिसमें सहायक कृषि अधिकारी के 18 व कृषि पर्यवेक्षक के 179 सहित कुल १९७ पद खाली हैं। इससे किसानों को नई तकनीक व उपलब्ध किस्मों की जानकारी नहीं मिल पाती है।
किसान बीज विक्रेताओं पर निर्भर
विभाग में खाली पदों व कार्मिकों की कमी के कारण निगरानी के अभाव में गैर अनुमत बीज, खाद व कीटनाशकों की बिक्री से भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। विभाग से तकनीकी सहयोग नहीं मिलने के कारण किसान बीज विक्रेताओं की सलाह पर निर्भर रहते है और फ सल व किस्म चयन के झांसे में आ जाते है। इससे किसान सही उत्पादन लेने से वंचित रह जाते है। यही हाल फ सलों में रोग व कीट प्रबंधन को लेकर है, इससे फ सल उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है और उत्पादन भी प्रभावित होता है।
विभागीय योजनाओं का समुचित लाभ नहीं
जिले में किसान बागवानी व संरक्षित खेती के प्रति रुचि दिखा रहे है लेकिन ऐसी फसलों के बारे में विभाग की ओर से तकनीकी सलाह नहीं मिलने से किसान समुचित लाभ नहीं उठा पा रहे है। इसी प्रकार विभिन्न अनुदान योजनाओं का भी जानकारी के अभाव में किसानों को समुचित लाभ नही मिल पाता है।
विभाग में पद खाली है। रिक्त पदों के प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजे गए है।
वीएस सोलंकी, उप निदेशक
कृषि विस्तार, जोधपुर
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