जोधपुर।
कृषि विश्वविद्यालय जिले के लूणी गांव के किसानों के जीवन में खुशहाली लाने का काम कर रहा है। कृषि विश्वविद्यालय ने सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन के तहत करीब ढाई साल पहले लूणी गांव को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए गोद लिया था। इसी का परिणाम है कि पूर्णत वर्षा आधारित खेती पर निर्भर गांव में कृषि उपज में फसल पैदावार में वृद्धि देखने को मिल रही है। राज्य सरकार की अन्त्योद्य योजना के तहत चयनित गांव लूणी को कृषि विश्वविद्यालय ने गोद लेकर स्मार्ट गांव में बदलने का बीडा उठाया था। इस बार भी मानसून से पहले विवि की ओर से किसानों को उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध कराए गए है।
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जैविक खेती के लिए कर रहा प्रोत्साहित
विवि की ओर से प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के अंतर्गत किसानों को जैविक खेती की जानकारी देकर जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रसार शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ ईश्वरसिंह व गोदित गांव लूणी के नोडल अधिकारी डॉ महेन्द्र कुमार के नेतृत्व में विश्वविद्यालय द्वारा विकसित बाजरा किस्म एमपीएमएच-17 के बीज किसानों को निशुल्क वितरित किए।
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विवि की ओर से लूणी गांव को स्मार्ट गांव के रूप में विकसित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे है।की योजना है। जिसमें कृषि, स्वास्थ्य, स्वच्छता अभियान, कौशल विकास, जल संरक्षण, कृषक-वैज्ञानिक संवाद, उन्नत बीज वितरण, समन्वित कीट प्रबंधन, कृषि में तकनीकी आदि अनेक कार्यक्रम शामिल है।
डॉ एमएल मेहरिया, जनसंपर्क अधिकारी
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर
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