अविनाश केवलिया/जोधपुर. अंधड़ और बारिश का मौसम बिजली निगम व डिस्कॉम्स के लिए परेशानी भरा रहता है, हर साल लाखों-करोड़ों का नुकसान होता है। लेकिन इसी अंधड़ और तेज हवाओं का एक सकारात्मक पहलू भी है। विंड एनर्जी के प्लांट जो कि पश्चिमी राजस्थान में बहुतायत में लगे हैं, इन हवाओं के कारण वहां बिजली उत्पादन बढ़ जाता है। सामान्य दिनों की तुलना में दो से तीन गुना तक बिजली उत्पादन होता है।
साढ़े तीन हजार मेगावाट में से 3 हजार मेगावाट उत्पादन
अप्रेल अंत से जो हवाएं चलनी शुरू हुई उसने मई और अब जून में अंधड़-बारिश का रूप लिया है। ऐसे में पश्चिमी राजस्थान में लगे हुए साढ़े तीन हजार मेगावाट से अधिक के प्लांट में से 3 हजार मेगावाट प्रतिदिन का उत्पादन हो रहा है जो कि सामान्य दिनों में 500 से एक हजार मेगावाट के बीच रहता है।
फैक्ट फाइल
- 30 अप्रेल को 234 एलयू
- 9 मई को 244 एलयू
- 25 मई को 272 एलयू
- 30 मई को 223 एलयू
- मई में औसत प्रतिदिन 250 एलयू बिजली उत्पादन हुआ
- 100-150 एलयू के बीच बिजली मार्च से पहले प्रतिदिन बनती थी
- 2 से ढाई गुना तक विंड एनर्जी का उत्पादन बढ़ा है।
(एलयू का मतलब लाख यूनिट प्रतिदिन है)
प्रदेश में विंड एनर्जी की स्थिति
प्रदेश में कुल 4 हजार 200 मेगावाट के प्लांट लगे हुए हैं। इनमें से करीब 150 मेगावाट के संचालित नहीं है। जैसलमेर-जोधपुर में ही अधिकांश पवन चक्कियां लगी हुई है।
- जैसलमेर में 3464 मेगावाट
- जोधपुर में 416 मेगावाट
- बाड़मेर में 49.6 मेगावाट
- सीकर में 7.2 मेगावाट
- चितौडगढ़-प्रतापगढ़ में 355 मेगावाट
इनका कहना है...
यह सीजन विंड एनर्जी जनरेशन के लिए सबसे अच्छा होता है। पश्चिमी विक्षोभ की हवाएं जो चलती हैं वह काफी फायदा करती हैं। आगामी कुछ माह तक और इसमें लाभ हो सकता है।
- बी.पी चौहान, मुख्य अभियंता, राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड जोधपुर
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