जोधपुर. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने कोरोना के उपचार के लिए गुडूची घनवटी यानी गिलोय की टेबलेट तैयार की है। पिछले 12 दिनों से संक्रमित मरीजों पर इसका क्लीनिकल ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। तीस दिन ट्रायल पूरी होने पर 30 जून के बाद दवा के विस्तृत परिणाम जारी किए जाएंगे।
राजस्थान में गिलोय का वृक्ष बहुतायत में पाया जाता है। यह एक बेल नुमा पौधा है। आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने अपने परिसर में उगे गिलोय पौधे के तने से विवि की फार्मेसी में ही टेबलेट तैयार की है। टेबलेट को काफी सांद्र किया गया है। यहां बोरानाडा स्थित कोविड-19 सेंटर में प्रशासन की ओर से विश्वविद्यालय को क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी गई है।
विवि के कुलपति डॉ अभिमन्यु कुमार सिंह के अनुसार मरीजों को सुबह और शाम 250 मिलीग्राम की 2-2 टेबलेट दी जा रही है। सर्वप्रथम 26 मरीजों को दी गई गुडूची घनवटी यानी गिलोय की टेबलेट से मरीज पांचवे दिन ही नेगेटिव आ गए। इसके बाद 18 और मरीजों को यही टेबलेट दी गई। वेे भी 4 दिन बाद नेगेटिव पाए गए। मरीज के नेगेटिव आने के बाद भी यह टेबलेट 30 दिनों तक दी जाएगी। यह सभी कोरोना मरीज अलाक्षणिक है। कोविड सेन्टर से छुट्टी होने के बाद भी घर से इन मरीजों को फॉलो किया जाएगा।
दो एंटीबॉडी टेस्ट से निगरानी
उन्होंने बताया कि कोरोना मरीजों को केवल आयुर्वेदिक दवाई दी जा रही है। एलोपैथिक की दवाई बिल्कुल बंद है। अभी तक कुल 43 मरीज परीक्षण के लिए रजिस्टर्ड किए गए हैं। गुडूजी घनवटी देने के साथ इन मरीजों के 2 एंटीबॉडी टेस्ट भी किए जा रहे हैं। इम्यूनोग्लोबुलीन और इंटरलिक्यूलिन-6 टेस्ट के जरिए गुडूची घनवटी के शरीर से हो रहे बदलाव रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। जो एंटीबॉडी बन रही है उन्हें नोट किया जा रहा है।
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