जोधपुर. कोरोना पॉजिटिव को लेकर सरकार से मिली नई गाइडलाइन ने संक्रमितों और उनके परिजनों की जान को सांसत में डाल दिया है। आजकल एक बार संक्रमित पाए जाने के बाद पुन: जांच नहीं हो रही है। ऐसे में कई लोग जान ही नहीं पा रहे है कि उनके शरीर से कोरोना वायरस का खात्मा हुआ कि नहीं? बिना दोबारा जांच किए मरीजों को डिस्चार्ज तक कर दिया जा रहा है। इस कारण कोरोना वायरस के खात्मे को लेकर उनके परिजनों में भी संशय बना हुआ है।
10 दिन में डिस्चार्ज, 17 दिन में आइसोलेशन से मुक्त
शहर में ज्यादातर मरीज होम आइसोलेशन में चल रहे है, होम आइसोलेशन में वे लोग ज्यादा हैं, जो युवा है और जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं है। इसके बाद बिना लक्षण वाले संक्रमित और अन्य क्रॉनिक डिजीज वालों को बोरानाडा कोविड सेंटर ले जाया जा रहा है। इन रोगियों को दस दिन बाद स्वास्थ्य विभाग खुद ही डिस्चार्ज में शो कर देता है। इन्हें 17 दिन बाद होम आइसोलेशन से मुक्त कर दिया जाता है।
दो-दो माह तक नहीं गया शरीर से संक्रमण
शहर में दो-तीन केस एेसे भी हैं जिनमें रोगियों को मुक्त होने में तीन माह लग गए। कई रोगी दो माह से डिस्चार्ज होने के बाद 17 दिन बाद फिर पॉजिटिव आ गए। लंबे समय से शरीर में संक्रमण झेल रहे कई रोगी तो चिकित्सकों के लिए चैलेंज बन गए थे। एेसे में सरकार बिना दूसरा कोरोना टेस्ट कराए मरीजों को डिस्चार्ज कर खतरा मोल ले रही है।
इनका कहना
इन तय दिवसों के बाद व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाता है तो वह दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकता है। अब नई गाइड लाइन अनुसार कार्य हो रहा है।
- डॉ. बलवंत मंडा, सीएमएचओ
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