सपनों का आशियाना बनाना हुआ महंगा, लॉकडाउन के बाद सीमेंट-सरिए के भावों में दिखी वृद्धि

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ओम टेलर/जोधपुर. कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच गाडिय़ों की कम आवाजाही, फेक्ट्रियों में कम उत्पादन, बेमौसम बरसात जैसे दिक्कतों का असर बिल्डिंग मेटेरियल पर भी देखने को मिल रहा है। भवन निर्माण में काम आने वाली सीमेंट से लेकर आरसीसी सरिए के भावों में तेजी आई है। ऐसे में अधिकतर निर्माण एजेंसियों का भी काम धीमा पड़ा है तो खुद का मकान बनाने का सपना देखने वाले सैकड़ों शहरवासियों ने भी फिलहाल मकान बनाने के अपने सपने पर बे्रक लगा रखा है।

सीमेंट - एक कट्टे पर बढ़ गए 30 से 40 रुपए
सीमेंट विक्रेता मोहित चौहान ने बताया कि लॉकडाउन से पहले 43 ग्रेड सीमेंट का कट्टा 330-340 रुपए में आ रहा था वह अब 390-400 रुपए में आ रहा है। 53 ग्रेड सीमेंट के कट्टे में भी 30-40 रुपए का इजाफा हुआ है।

सरिया - प्रति किलो बढ़ गए तीन रुपए
लोहे के सरिए के विक्रेता सलीमबक्स ने बताया कि लॉकडाउन से पहले 38 रुपए प्लस जीएसटी के भाव प्रति किलो चल रहे थे। वर्तमान में 40-41 रुपए प्लस जीएसटी के भाव चल रहे है। सरियों में प्रति किलो दो से तीन रुपए के भाव बढ़े है।

बजरी व पत्थरों के भाव स्थिर
बजरी विक्रेता सुमन शर्मा ने बताया कि मजूदर पलायन कर गए हैं। बजरी के भाव स्थिर है। 20 रुपए फीट के हिसाब से बजरी बेची जा रही है। पत्थरों के भावों में भी कोई खास इजाफा नहीं हुआ।

सीमेंट, सरिए व मजदूरी बढऩे से बढ़ गया खर्चा
महामंदिर क्षेत्र में मकान निर्माण करवा रहे आमीन खान ने बताया कि लॉक डाउन से पहले निर्माण शुरू करवाया था। लॉकडाउन में काम बंद रहा। अब सीमेंट व सरियों के भाव के साथ मजदूरी भी महंगी हो गई है। पहले कारीगर 700 रुपए प्रतिदिन लेते थे अब 900 रुपए ले रहे है। मजदूर 400 रुपए लेते थे अब 450-500 रुपए तक ले रहे है। ऐसे में मकान की लागत भी बढ़ गई है।



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