जोधपुर. बाड़मेर के मुनाबाव में गुरुवार को प्रस्तावित भारत और पाकिस्तान के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों की अंतरराष्ट्रीय बैठक रद्द हो गई है। पाकिस्तान द्वारा बैठक में भाग नहीं लेने के कारण यह वार्ता रद्द करनी पड़ी। भारत ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है।
आजादी के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों की बैठकें एक दूसरे के देश में आयोजित की जाती है। रेगिस्तानी टिड्डी भारत-पाक पर गर्मियों में आक्रमण करती है। ऐसे में दोनों देशों की संयुक्त बैठक हर साल जून से नवंबर तक होती है। बैठक का स्थान एक महीने बाड़मेर का मुनाबाव और दूसरे महीने पाकिस्तान का खोखरापार होता हे। नवंबर 2019 के बाद यह पहला मौका था। भारत की ओर से 10 दिन पहले ही पाकिस्तान को पत्र लिखकर मुनाबाव का निमंत्रण दे दिया था लेकिन बुधवार रात तक कोई जवाब नहीं आने पर वार्ता रद्द घोषित करनी पड़ी।
पिछले साल अक्टूबर ने पाक रेंजर्स ने दरवाजा नहीं खोला
यह बैठक संयुक्त राष्ट्र के निर्देशन में होती है लेकिन पाकिस्तान अक्सर इसमें टालमटोल करता है। पिछले साल अक्टूबर में भारतीय अधिकारियों को खोखरापार जाना था लेकिन पाकिस्तानी सेना ने अपने रेंजर्स को जीरो लाइन का दरवाजा नहीं खोलने के आदेश दे रखे थे। नतीजन सुबह से शाम तक इंतजार करने के बाद भारतीय अधिकारी और बीएसएफ जवान खाली हाथ लौट आए।
कराची और दिल्ली में होती थी बैठकें
भारतीय उपमहाद्वीप में टिड्डी की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में आजादी के बाद से ही टिड्डी को लेकर भारत-पाक के मध्य उच्च स्तरीय वार्ता हुआ करती थी। ये बैठकें दिल्ली और कराची में कैबिनेट सचिव के स्तर पर होती थी। नब्बे के दशक के बाद टिड्डी हमला कम होने से यह अधिकारियों के स्तर पर मुनाबाव-खोखरापार में होने लगी।
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‘हमने पाकिस्तान को कई दिन पहले बैठक के बारे में जानकारी दे दी थी लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।
-डॉ केएल गुर्जर, उपनिदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर
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