अविनाश केवलिया/जोधपुर. भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से पूरे प्रदेश में करवाए गए गारबेज फ्री सिटी (कचरा मुक्त शहर) के सर्वे रेटिंग में जोधपुर सहित प्रदेश का एक भी शहर स्थान नहीं बना पाया है। मंगलवार को मंत्रालय की ओर से जारी की गई सूची में देश के 141 निकायों को स्थान मिला है। इसमें राजस्थान का एक भी शहर नहीं है। पिछले साल जोधपुर को इस श्रेणी में सिंगल स्टार रेटिंग हासिल थी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 की कड़ी में ही मंत्रालय की ओर से रेटिंग सर्वे करवाया गया था।
यह सर्वे हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण के साथ ही चलता है। इसके लिए टीम अलग से आती है। जोधपुर सहित प्रदेश में यह सर्वे जनवरी माह में हुआ था। इसमें मुख्य रूप से वेस्ट मैनजमेंट को देखा जाता है। लेकिन अफसोस की बात है कि प्रदेश के एक भी शहर में वेस्ट मैनजमेंट और खास तौर पर कचरा निस्तारण ठीक नहीं पाया गया। इसलिए कोई शहर रेटिंग की सूची में शामिल तक नहीं हो पाया। इस दौड़ में 698 शहरों को सर्वे के लिए चुना गया था, जिसमें से 141 की रेटिंग जारी की गई है।
यह है टॉप पर
- 6 शहर फाइव स्टार श्रेणी में
- 65 शहर थ्री स्टार श्रेणी में
- 70 शहर सिंगल स्टार श्रेणी में
फाइव स्टार श्रेणी में ये शहर
छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर, गुजरात का राजकोट, सूरत, कर्नाटक का मैसूर, मध्यप्रदेश का इंदौर और महाराष्ट्र का नवी मुम्बई फाइव स्टार रेटिंग ले पाया है।
जोधपुर के पिछडऩे के दो कारण
1. कचरा निस्तारण नहीं : शहर का कचरा जो एकत्रित किया जाता है वह केरू डम्पिंग यार्ड तक जाता है। यहां कचरा पृथककरण व निस्तारण प्लांट शुरू नहीं होने का नुकसान जोधपुर को हुआ और इसके नम्बर नहीं मिले। इसके अलावा कचरा संग्रहण व परिवहन की व्यवस्था ठीक थी।
2. स्मार्ट सिटी में नहीं होने का दंश : जोधपुर को कचरा निस्तारण के लिए अलग से कोई बजट नहीं मिला। जबकि प्रदेश के चार बड़े शहर जो स्मार्ट सिटी में शामिल है वहां कई प्रोजेक्ट शुरू हुए। इसका नुकसान शहर को हुआ और पिछले बार से भी एक कदम नीचे फिसल गया।
अब स्वच्छता सर्वेक्षण का इंतजार
स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 का परिणाम भी एक सप्ताह के अंदर जारी होने की संभावना है। लेकिन रेटिंग सूची से बाहर होने का नुकसान वहां भी अंकों में होगा। इस बार सर्वेक्षण से पहले नगर निगम जोधपुर ने सिंगल स्टार से अपग्रेड होकर थ्री स्टार के लिए आवेदन किया था।
इनका कहना हैं...
इस बार पैरा मीटर काफी हाई थे। कचरा निस्तारण जो केरू में होता है वह सर्वे टीम के स्टैंडर्ड के अनुरूप नहीं था। इसलिए रेटिंग सूची में नम्बर नहीं आया। प्रदेश के वह शहर जो पिछले बार हमसे आगे थे वह भी पिछड़े हैं।
- सुरेश कुमार ओला, आयुक्त, नगर निगम जोधपुर
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