जोधपुर के इन प्रवासियों ने विदेशों की नौकरी छोड़ी, अब अपने शहर में वापस बस कर बन गए सफलता की मिसाल

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. कोविड-19 का एक इफेक्ट यह हुआ कि इन दिनों कई प्रवासी अपनी माटी की ओर लौट रहे हैं। चाहे देश के अलग-अलग कोने से हो या विदेश में व्यापार-नौकरी करने वाले, सभी कतार में हैं। लॉकडाउन के बाद जैसे-जैसे जीवन पटरी पर लौटने लगा है बड़ा सवाल यह है कि अपनी माटी की ओर लौटे प्रवासियों के पास आजीविका का क्या विकल्प है। आज हम आपको मिला रहे हैं ऐसे ही लोगों से जो अपने शहर-घर से दूर काफी सफल थे, लेकिन समय रहते निर्णय किए व जोधपुर लौट आए। यहां लौट कर अवसर पैदा किए और सफलता के पथ पर चल रहे हैं।

सिंगापुर से जोधपुर
सचिन खत्री सिंगापुर में केपीएमजी कंपनी में कंसल्टिंग करते थे। सीआइओ पोस्ट पर रहे सचिन बताते हैं कि दो साल से भी ज्यादा समय से जोधपुर में हूं। अपना बिजनेस शुरू किया। डिजिटल सोल्यूशन क्लाइंटस को जो सिंगापुर-आस्ट्रेलिया से हैं। पूरे देश में स्टाफ है और कोई ऑफिस नहीं, सभी वर्क फ्रॉम होम करते हैं। यह तरीका सफल है और आरामदायक भी। अपने शहर में भी अवसर बहुत हैं, ढूंढने वाला चाहिए।

पूरी दुनिया घूमी, अपना देश बेहतर
रोहित जैन जो कि सीए हैं वे मुम्बई में काम करते थे। जिस कंपनी में थे उसके काम से पूरी दुनिया घूमी, इंडिया बेहतर है। रोहित बताते हैं कि अगर टैलेंट है तो कहीं से सफलता मिल सकती है। लैपटाप ही ऑफिस है। पांच साल मुम्बई में काम करने के बाद 9 साल पहले जोधपुर में सेटल हो गया। अब पिछले कुछ साल में कल्चर बदल रहा है, कई बड़ी कंपनियां वर्क फ्रॉम होम को तवज्जो दे रही है। टियर 2 व 3 सिटी के लिए अच्छे संकेत है।

अपने घर लौटे और स्टार्टअप में छा गए
देवेश राखेचा मुम्बई में दुनिया की दूसरी बड़ी इंवेस्टमेंट कंपनी मॉर्गन स्टेनली में काम करते थे। पांच साल जॉब की, लेकिन फिर लगा अपना शहर की बेहतर है। यहां आकर पहले कुछ साल अलग-अलग नौकरियां की। लेकिन पिछले दो साल से ईयर बुक नाम की स्टार्टअप फर्म चला रहे हैं। सुशील शर्मा के साथ मारवाड़ी कैटेलिस्ट स्टार्ट अप प्लेटफार्म में भी हैं।

अब परिवार के साथ क्वालिटी टाइम
रौनक सिंघवी जो कि 6-7 साल तक गुडग़ांव में रहे। लेकिन लॉकडाउन होने से ठीक पहले जोधपुर आ गए। यहां सेटल होने के इरादे से इन्होंने डिजिटल एजुकेशन का प्लेटफार्म भी शुरू किया। रौनक बताते हैं कि यहां सबकुछ है, परिवार-कम्युनिटी का सपोर्ट सिस्टम है। अवसर भी खूब है, जिनको ढूंढने वाला चाहिए।



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