नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. हजारों तरह रंग अलग-अलग खान-पान विभिन्नताएं होते हुए भी हर साल शीतकाल में आने वाले प्रवासी पक्षियों में कोई भेदभाव, वर्गीकरण और किसी तरह का वैमनस्य नहीं है। प्रवासी पक्षी अपने लक्ष्य पर सामूहिक रूप से अपनी गति से चलते हुए सहजीवन को अपनाते हैं। अपना लक्ष्य तय कर हर साल छह माह तक प्रवास के लिए डेमोसाइल क्रेन (कुरजां) के समूह हिम आच्छादित देशों उत्तरी रूस, उक्रेन तथा कजाकिस्तान से हजारों किमी का रास्ता प्रकृति से सामंजस्य स्थापित करते हुए पूरा करती है। जोधपुर जिले के खींचन गांव में 25 से 30 हजार की संख्या में पड़ाव डालने वाले कुरजां को खींचन में भी हिंसक श्वानों, जहरीले दानों, बिजली के तारों में उलझकर घायल होने जैसी कई समस्याओं के बावजूद उनकी संख्या में कोई कमी नहीं आई है।
जीने की प्रेरणा देते पक्षी
प्रकृति ने पृथ्वी पर हर जीव-जंतु को स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार दिया है। जोधपुर और मारवाड़वासियों का प्रकृति से जुड़ाव और पक्षियों की सेवा दिनचर्या का हिस्सा है। पक्षी पर्यावरण संतुलन के साथ हमें जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
-गोपाल कृष्ण व्यास, पूर्व न्यायाधीश
प्रेम के संदेशवाहक
हिमालय जैसे विकट पर्वत शृंखला को पार कर थार के रेगिस्तान तक पहुंचने वाले प्रवासी पक्षी हमें अपने हौसलों को बुलंद रखते हुए लक्ष्य प्राप्ति का संदेश देते हैं। जोधपुर जिले में हर साल आने वाले अलग रंग-आकार के 125 प्रजातियों के पक्षी सभी को एकता और प्रेम से रहने का संदेश देते हैं।
-शरद पुरोहित, पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ
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