जोधपुर. एक महीना पूरा हो चुका है जोधपुर शहर की जनता लॉक डाउन की पालना कर रही है। कुछ जगह सजगता के साथ तो कहीं ढील भी रही है। परकोटा शहर को पिछले 15 दिन से सख्त कफ्र्यू में है। ऐसे में सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रशासन की है जरूरत का सामान सप्लाई चेन के माध्यम से लोगों को मिलता रहे। लेकिन प्रशासन व पुलिस के बीच सामंजस्य की खाई ही कहेंगे कि जो व्यवस्था प्रशासनिक विभागों ने अलग-अलग की है वह धरातल पर पूरी होती नहीं दिखती। परकोटा शहर में सप्लाई चेन की व्यवस्था पर विशेष रिपोट...
किराणा व्यवस्था : तीन प्रकार से ब्रेक हो रही चेन
- सबसे पहले बात करते हैं परकोटा शहर में किराणा व्यवस्था की। हर मोहल्ले में ऐसे दुकानदारों को पास जारी किए जो दुकान तो नहीं खोलेंगे लेकिन घरों तक सप्लाई करेंगे। पिछले पांच दिन से इनको सामान लाने की अनुमति नहीं दी जा रही। यह चेन टूट गई।
- कफ्र्यू ग्रस्त क्षेत्र में जोधपुर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार की ओर से 26 गाड़ी के जरिए खाद्य सामग्री की आपूर्ति का दावा है। 22 प्रकार की खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। लेकिन संकरी गलियों में ये वाहन नहीं पहुंचते। मुख्य मोहल्लों में खड़े वाहनों की जानकारी गलियों के भीतर नहीं पहुंचती व सप्लाई चेन बाधित।
- ऑनलाइन एप्लीकेशन के जरिये 900 से अधिक लोगों तक सामान पहुंचाया गया है। लेकिन खुद महाप्रबंधक आर.सी मीणा मानते हैं कि छोटी गलियों में भंडार की गाड़ी नहीं जा पाती। ऐसे में सामान नहीं पहुंचने से सप्लाई चेन ब्रेक।
सब्जी व्यवस्था
- मोहल्लों में सब्जी बेचने वाले जो कुछ दिन पहले तक पास के जरिये घरों तक सप्लाई कर रहे थे अब उन्हें रोक दिया गया है।
- सब्जी मंडी की ओर से जो हाथ ठेला चालक व टैक्सी चालक परमिटधारी हैं वह गलियों में नहीं पहुंच रहे। इसका कारण अधिकांश गलियों पर बल्लियां लगा होना है। ऐसे में यह चेन भी टूट रही।
दूध सप्लाई
- कफ्र्यू क्षेत्र के बाहर से आने वाले दूध सप्लाई वाले चाहे पास धारक हो उनका प्रवेश पिछले कुछ दिन से बंद कर दिया गया है। ऐसे में यह चेन ब्रेक हो गई।
- सरस डेयरी की गाड़ी ही सप्लाई कर रही है। लेकिन यह भी एक मोहल्ले की डेयरी तक सामान पहुंचाती है। इसके बाद डेयरी से आगे डोर टू डोर तक व्यवस्था नहीं है। यहां भी कड़ी टूट रही है।
गैस सिलेंडर
गैस सिलेंडर सप्लाई करने वाले बड़ी गाड़ी लाकर एक मोहल्ले में खड़ी कर देते हैं। इसके बाद ग्राहकों को घर से निकल कर 500 मीटर की दूरी तक तय करनी पड़ रही इन गाडिय़ों तक पहुंचने के लिए। यह चेन भी टूट रही।
यह भी हालात
शहर के भीतर एक मात्र राजकीय सेटेलाइट अस्पताल महिलाबाग में सामान्य जांच के लिए मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। एक मरीज का दो से तीन घंटे बाद नम्बर आ रहा है। ऐसे में मर्ज घटने की बजाय बढ़ रहा है।
यह हो सकते हैं कुछ समाधान
1. जिस प्रकार एटीएम वेन डिलीवरी से पहले संबंधित क्षेत्र में एक दिन पहले सूचना देती है उसी प्रकार किराणा गाड़ी, सब्जी की गाड़ी व दूध सप्लाई के साथ गैस सिलेंडर की सप्लाई की सूचना भी उस क्षेत्र के लोगों को दी जानी चाहिए। उनका स्थान, समय की जानकारी मीडिया या सोशल मीडिया के जरिये दी जानी चाहिए।
2. जो पास धारक व्यापारी है उनकी सप्लाई चेन न टूटे यह पुलिस व प्रशासन सुनिश्चित करे। इससे मोहल्ले में किराणा, सब्जी व दूध वाला घरों तक सामान पहुंचा सके।
3. पुलिस मित्रों का उपयोग इस समस्या के समाधान के रूप में हो सकता है। एक पुलिस मित्र को तीन से चार गलियों का जिम्मा देकर उस क्षेत्र में आने वाले किराणा, सब्जी व दूध की सप्लाई की जानकारी व डोर टू डोर सप्लाई करवाई जा सकती है।
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