अविनाश केवलिया/जोधपुर. प्रदेश में ऐसी इकाइयां जो मेडिकल उपकरण या दवाइयां बनाती हैं उनको क्षमता से अधिक मात्रा में उत्पादन करना पड़ रहा है। कोविड-19 के प्रकोप के चलते इन उत्पादन को बढ़ाने के सरकार से निर्देश हैं, ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण मंडल से मिलने वाली कंसेंट में भी बदलाव करना पड़ता है। लेकिन राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने इस नियम में छूट दी है।
आरपीसीबी मुख्यालय से सदस्य सचिव शैलजा देवल ने मंगलवार को यह आदेश जारी किए हैं। ऐसी फैक्ट्रियां या इकाइयां जो मेडिकल उपकरण, दवाइयां, पीपीई किट, सेनिटाइजर व ऑक्सीजन सिलेंडर के क्षेत्र में काम करती है उनको बड़ी मात्रा में उत्पादन बढ़ाना है। ऐसे में उनको क्षमता बढ़ाने के लिए आरपीसीबी से अनुमति लेनी पड़ती है। ऐसी इकाइयां जो पहले से निर्माण कर रही है या जो नई कंसेंट लेना चाहती है उन्हें छूट दी गई है। 31 जुलाई तक इन उपकरणों व उत्पादों का निर्माण इस छूट के तहत किया जा सकता है।
सीटीई व सीटीओ
ऐसी इकाइयों को काम शुरू करने से पहले व उत्पादन मात्रा बढ़ाने से पहले कंसेट टू स्टेब्लिशमेंट व कंसेंट टू ऑपरेट लेनी होती है। लेकिन आरपीसीबी ने इसमें छूट दी है।
इनके उत्पादन व निर्माण पर छूट
वेंटिलेटर, स्ट्रेचर, व्हील चेयर व आइसीयू में काम आने वाले उपकरण। लाइफ सेविंग ड्रग्स बनाने वाली इकाइयां। फेस मास्क, पीपीई किट, सेनिटाइजर, ऑक्सीजन सिलेंडर का काम करने वाली इकाइयों को छूट रहेगी। इन सभी छूट वाली इकाइयों को छूट अवधि के बाद कंसेंट के लिए आवेदन करना होगा। वायु व जल प्रदूषण एक्ट के सभी नियमों का पालन इन सभी इकाइयों को करने के निर्देश दिए गए हैं।
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