कोरोना के कर्मवीर : दलगत राजनीति भूलकर हो रही वन्यजीवों की सेवा

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जोधपुर. इंसानों के साथ वन्यजीवों के लिए कोरोना महामारी के रूप में आफत बने अप्रेल माह में लॉक डाउन के दौरान जिले के करीब 30 हजार से अधिक भूखे प्यासे वन्यजीवों के लिए दलगत राजनीति भूलकर सेवा के अनूठे उदाहरण नजर आ रहे है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी, कोरोना लॉकडाउन और सरकारी बजट के अभाव के बीच जिले के 153 से अधिक जगहों पर स्वच्छंद विचरण करने वाले चिंकारे, ब्लेक बक, रोजड़े और विभिन्न प्रजातियों के प्यासे पक्षियों के लिए भामाशाह व पर्यावरणप्रेमियों के साथ भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता भी दलगत राजनीति से परे वन्यजीवों के लिए सेवाएं प्रदान कर रहे है।

विश्नोई टाईगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल भवाद ने बताया कि सरकारी बजट के अभाव में वन्यजीवों के लिए रेडिमेड खेळियों का इंतजाम किया गया जिसमें जलापूर्ति के लिए भामाशाहों के साथ महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी योगदान दे रहे है। लूणी विधायक महेन्द्र विश्नोई भी अपने निजी खर्चे से रूडकली, पालासनी, सेवालों की ढाणी, ब्लेक बक बहुल कांकाणी, खारा बेरा पुरोहितान आदि वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में पानी के टैंकरों की व्यवस्था की है।

वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में रामनिवास बुधनगर, ओमप्रकाश, मनीष, रामदीन, महकाराम, जबरसिंह, पूर्व सरपंच हप्पाराम आदि सहयोग कर रहे है। बीटीएफ के प्रदेश उपाध्यक्ष रामनिवास धोरू ने बताया कि जिले के वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में 151 पानी की रेडिमेड खेलिया की व्यवस्था कर नियमित जलापूर्ति में भरत खेड़ी, विष्णु सारण, जय सियाग, परमेश बिडिय़ार, कालूराम, अनिल सोऊ, घेवर सियाग सहयोग कर रहे है।

corona ke karamvir : people are providing services during lockdown

27 हजार लोगों के भोजन का रसोड़ा संभालते हैं
जोधपुर नगर निगम की ओर से सुबह और शाम मिलाकर 27 हजार फूड पैकेट तैयार किए जाते हैं। जिन्हें जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 200 से ज्यादा लोग काम करते हैैं, लेकिन मुख्य रूप से जो रसोड़ा संभाल रहे हैं वह हरि ओम (कपच) पुरोहित। पुरोहित जब सुबह घर से निकलते हैं तो उनको व परिवार के लोगों को भी एक डर लगा रहता है। लेकिन उन्होंने अपने कामकाज व दिनचर्या को इस कदर मोड़ा है कि इम्युनिटी भी बढ़ सके और ड्यूटी के साथ सेवा भी हो सके। वे बताते हैं कि सुबह 5.30 उठकर आयुर्वेदिक काढ़ा पीने के बाद छत पर 1.30 घंटे योग, प्राणायाम व टहलना होता है।

पूजा-पाठ कर नाश्ता करके गर्म पानी की बोतल व टिफिन लेकर 9 बजे घर से निकलते हैं। निगम के रसोड़े में प्रतिदिन 250 से ज्यादा लोगों का आना-जाना रहता है। इनमें कई लोग संक्रमित क्षेत्र से भी होकर आते हैं, ऐसे में सेनेटाइजेशन का भी ध्यान रखना होता है। 12 घंटे से ज्यादा ड्यूटी करने के बाद रात 10 बजे घर पहुंचते हैं। हल्दी का दूध, अदरक, दाल चीनी, काली मिर्च, निम्बू व गर्म पानी नियमित सेवन करते हैं। पुरोहित भीतरी शहर की जानी-मानी शख्शियत है व फिल्म कलाकार भी रहे हैं।



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