जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने कोरोना से लडऩे के लिए एक उपकरण विकसित किया है जो पराबैंगनी किरणों और ऑक्सीकारकों की मदद से उपकरणों को सेनेटाइज करता है। इससे मास्क, एप्रेन, पीपीई किट सहित अन्य उपकरण दुबारा उपयोग में लिए जा सकते हैं। यह उपकरण 15 दिन में तैयार कर एम्स जोधपुर में परीक्षण किया जा चुका है। फिलहाल एम्स में इसका उपयोग एन-95 मास्क के सेनेटाइजेशन में किया जाएगा। यह उपकरण एक दिन में 200 मास्क सेनेटाइज कर सकता है, जिससे मास्क की कमी की समस्या को दूर किया जा सकेगा।
ऐसे बनाया उपकरण
जिला परिषद के सीईओ डॉ.इंद्रजीत यादव के साथ मिलकर आइआइटी के फिजिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल व बायोसाइंस विभाग ने मिलकर प्रोजेक्ट शुरू किया। लॉकडाउन के चलते जिला प्रशासन ने आइआइटी को जरुरी सामान के लिए पास भी जारी किया। परियोजना प्रमुख प्रो.राम प्रकाश ने बताया कि यह एडवांस फोटोकैटाइटिक ऑक्सीडेशन स्टरलाइजेशन सिस्टम है जो पराबैंगनी विकिरणों और धात्विक ऑक्साइड के नैनों कणों पर आधारित है। इसके अंतर्गत एक एसेम्बली में पराबैंगनी विकिरणों का स्त्रोत और एक धात्विक ऑक्साइड के नैनो कणों की परत लगे पैनल समानांतर क्रम में लगाए गए हैं। पराबैंगनी विकिरणें निकल धात्विक पैनल से टकराकर हाईड्रोजन पराक्साइड, हाईड्रोक्सिल आयन जैसे ऑक्साइड उत्पन्न करती है जो स्टरलाइजेशन प्रोसेस को काफी बढ़ा देती है। दो ऐसेम्बली के बीच मास्क या अन्य मेडिकल उपकरण रखकर उसको 5 मिनट में सेनेटाइज किया जा सकता है।
15 दिन में उपकरण विकसित करने वाली टीम
आइआइटी की इस टीम में प्रो. दीपक फुलवानी, प्रो अम्बेश दीक्षित, प्रो.अंकुर गुप्ता, प्रो.शंकर मनोहरन और कुछ शोधार्थी छात्र प्रमुख रूप से शामिल थे। एम्स में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एचओडी प्रो विजयलक्ष्मी नाग और डॉ. विभोर टाक ने इसका परीक्षण किया।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर फ्री
इस तकनीक का वृहद स्तर पर उत्पादन के लिए हम टेक्नोलॉजी ट्रांसफर फ्री में करेंगे ताकि अधिक से अधिक उपकरण बनाकर कोरोना से निपटा जा सके।
-प्रो.शांतनु चौधरी, निदेशक, आइआइटी जोधपुर
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