लॉकडाउन में फंसे जोधपुर घूमने आए विदेशी मेहमान, अपने देश की तुलना में खुद को यहां मान रहे सुरक्षित

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ओम टेलर/जोधुपर. जोधपुर का ऐतिहासिक वैभव देखने की इच्छा से आए कई विदेशी मेहमान लॉकडाउन के चक्कर में इन दिनों एक कमरे में कैद होकर रह गए हैं। किसी को मनपसंद खाना नहीं मिलने की परेशानी है तो कोई कह रहा है कि कोरोना के चलते वे तो रूम से बाहर निकलने से भी डर रहे है तो कोई कह रहा है कि उनके देश में कोरोना को लेकर स्थिति इंडिया से ज्यादा बिगड़ी हुई है इसलिए वे जोधपुर में सुरक्षित हैं। इसलिए फिलहाल अपने देश नहीं जाना चाहते है। पूछने पर उन्होंने बताया कि उनका स्वास्थ्य ठीक है। खांसी, बुखार कुछ नहीं है। उनका पूरा दिन होटल में ही बीत रहा है। शहर के भीतरी भाग में करीब दस से अधिक विदेशी मेहमान ठहरे हुए हैं जिनके दिन इन दिनों रूम में ही गुजर रहे है।

बदलने पड़े तीन होटल
मैं थाइलैंड की एक स्कूल में टीचर हूं। दिल्ली, आगरा, जयपुर घूमने के बाद 20 मार्च को जोधपुर आई थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते उनका जोधपुर घूमने का सपना अभी अधूरा है। लॉकडाउन के चलते होटल बंद होने लगे ऐसे में उन्हें भी तीन होटल बदलने पड़े। अब एक कमरे में दिन भर रहना पड़ रहा है। सुबह छत पर जाकर थोड़ा व्यायाम कर लेती हूं। पसंद का खाना नहीं मिल रहा ऐसे में इन दिनों फल, चावल खिचड़ी खा रही हूं।
- सोफिया, थाइलैंड

अमेरिका में स्थिति ज्यादा खराब यहां सुरक्षित है
पेश से इंजीनियर हूं। दोस्त के साथ एक साल का वीजा लेकर इंडिया घूमने आया था। दिल्ली, आगरा, जयपुर घूमने के बाद जोधपुर आए। लेकिन लॉकडाउन के चलते इन दिनों होटल से बाहर भी नहीं जा पा रहे है। कोरोना को लेकर अमेरिका में स्थिति कुछ खराब है इसलिए यहां सुरक्षित है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद जोधपुर घूमने का अपना सपना पूरा करेंगे।
- एलियट, अमेरिका

भारतीय कल्चर को देखने आई हूं
पेशे से आर्किटेक्चर हूं। भारत विशेषकर राजस्थानी कल्चर को देखने आई थी। लेकिन लॉकडाउन के चलते इन दिनों होटल से बाहर तक नहीं जा पा रहे हैं। स्थिति सुधरने के बाद जोधपुर सहित राजस्थान के अन्य शहरों का भ्रमण पूरा करूंगी।
- जेनोफर, अमेरिका

रूम में बैठे-बैठे हो गया हूं परेशान
लॉकडाउन के चलते जोधपुर नहीं घूम पा रहा हूं। होटल के रूम में बैठे-बैठे अब तो परेशान होने लगा हूं। जोधपुर के लोग अच्छे है। खाना अच्छा मिल जाता है। मुम्बई, चेन्नई, तमिलनाडू घूम चुका हूं। इंग्लैंड जाने की व्यवस्था होगी तो चला जाऊंगा।
- स्टेफिन, इंग्लैंड



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