जोधपुर। मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद से कांग्रेस में तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है। जहां मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपनी सत्ता डगमगाती दिख रही है। वहीं इस आग की आंच राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को भी झुलसाने लगी है।
सियासी गलियारों में राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के भी भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं का बाजार गर्म है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे खास माने जाने वाले जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के इस बयान से राज्य की सरकार में हलचल मच गई है। मंत्री शेखावत ने राजस्थान के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कहा कि थोड़ा इंतजार कीजिए, क्योंकि इंतजार का फल मीठा होता है। उल्लेखनीय है कि उनसे सवाल किया गया था कि सचिन पायलट भी क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर चलेंगे?
मंत्री शेखावत ने कहा है कि देश में अभी बहुत सी ऐसी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। कांग्रेस के युवा नेताओं पर कहा कि ज्योतिरादित्य और सचिन ने कई साल साथ काम किया है। दोनों युवा हैं और एक ही पीढ़ी के नेता हैं। दोनों की पृष्ठभूमि भी करीब एक सी हैं और दोनों वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में दोनों मेंं घनिष्ठता होना लाजमी है लेकिन आगे क्या होगा इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा, क्यूंकि कहते हैं न इंतजार का फल मीठा होता है।
मीडिया से सवाल जवाब में शेखावत ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार ने झूठे वादे किए हैं और भ्रम का जाल बिछाया है। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस अपने सारे वादे भूल जाती है। यही कारण है कि आज वह हाशिए पर आ चुकी है। जनता उन्हें हर क्षेत्र में नकार रही है। कांग्रेस ने आज तक जनता को धर्म के नाम पर बांटने का काम ही किया है। कांग्रेस अपनी नीतियों के कारण लगातार अप्रासंगिक होती जा रही है।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोडऩे के सवाल पर कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से प्रदेश में उद्योग-धंधे बंद पड़ गए थे। किसान परेशान हैं। कमलनाथ सरकार ने न जाने किस बात का बदला लेते हुए शिवराज सिंह चौहान के समय जनता के कल्याणकारी योजनाओं को बंद किया है। मध्य प्रदेश में हालात निश्चित रूप से चिंताजनक थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जिस वादे को लेकर सत्ता में आई थी। उसमें दस दिनों में किसानों का पूरा कर्ज माफ करना था लेकिन दुर्भाग्य है कि कर्जमाफी के नाम पर केवल नौटंकी रची गई और खानापूर्ति की गई। दूसरा वादा बेरोजगारों को भत्ता देने का था लेकिन वे सब आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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