मारवाड़ का ऐतिहासिक शीतला माता मेला 15 से, 36 कौम के लोग दरबार में नवाते हैं शीश

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नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. नागौरीगेट के बाहर कागा स्थित शीतला मंदिर के सामने मैदान में दस दिवसीय शीतला माता मेले के लिए झूले, स्टॉल्स के साथ बेरिकेडिंग लगाने का काम शुरू हो गया हैं। बच्चों को चर्म संबंधी बीमारियों से संरक्षण की मनौती से जुड़ा शीतलाष्टमी मेला इस बार 15 मार्च को शाम 4.30 बजे ध्वजारोहण के साथ शुरू होगा। मेले की विशेषता यह है कि इसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी 36 कौम और जाति वर्ग के श्रद्धालु मां शीतला के दरबार में शीश नवाते है।

शीतला माताजी कागा तीर्थ ट्रस्ट अध्यक्ष निर्मल कच्छवाह ने बताया कि उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि भारत सेवा संस्थान के ट्रस्टी जसवंतसिंह कच्छवाह व जेडीए के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र सोलंकी होंगे। अध्यक्षता पूर्व मंत्री व नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजेन्द्र गहलोत करेंगे। शाम 4.30 बजे उद्घाटन समारोह के दौरान माता शीतला के पूजन के बाद मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण किया जाएगा।

घरों में ‘ठंडा’ 16 मार्च को
घरों में भी 16 मार्च को शीतला माता, ओरी माता, अचपड़ाजी एवं पंथवारी माता का प्रतीक बनाकर पूजन किया जाएगा। शीतलाष्टमी को कई घरों की रसोई में चूल्हा नहीं जलता। घरों में ठंडा प्रसादी के रूप में एक दिन पहले बनाए गए राब, करबा, मीठी-नमकीन पुडिय़ां, सोगरा, पचकुटे व केरी-गूंदा की सब्जी, केरी पाक, लांजी, शक्कर पारे, मठरी, सलेवड़े, खीचिए, पापड़, गुलगुले, खाजा, कांजी बड़े, दही बड़े आदि कई तरह के पारम्परिक पकवान बनाकर मां शीतला को भोग अर्पित करने के बाद सेवन किया जाता है।

केवल जोधपुर में अष्टमी को शीतला पूजन
शीतला माता पूजन वैसे तो पूरे भारत में चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी को होता है लेकिन केवल जोधपुर में दूसरे दिन अष्टमी के दिन मां शीतला का पूजन किया जाता है। इसका प्रमुख कारण करीब 248 साल पूर्व विक्रम संवत 1826 में सप्तमी के दिन तत्कालीन जोधपुर के महाराजा विजयसिंह के महाराज कुमार की मृत्यु होने से जोधपुर सहित मारवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों में अकता रखने की परम्परा है।

मां शीतला के हाथ में झाडू स्वच्छता का प्रतीक
शीतला माता के हाथ में झाडू घर तथा आसपास की स्वच्छता का प्रतीक है। दूसरे हाथ में कलश जहां धोने का प्रतीक है। अन्न को विशुद्ध बनाने के प्रधान साधक सूप को शीतला माता ने अपने सिर का भूषण बना रखा है। किवदंती है कि जिस घर में भोजन सामग्री की विशुद्धता का ध्यान रखा जाता है, उस घर पर माता कभी कुपित नहीं होती है।



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