कोरोना संदिग्ध ने बयां की पीड़ा : जितना बैंगलुरु से आने में नहीं लगा, उतना अस्पताल पहुंचाने में लगा दिया समय

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जोधपुर. जोधपुर में कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा। लंदन से बैंगलुरु और वहां से जोधपुर आए एक युवक की तबीयत नासाज होने के कारण गुरुवार को उसे एयरपोर्ट पर रोक दिया गया। उसे संदिग्ध मान एमडीएम अस्पताल भर्ती कराया गया। इस बीच अव्यवस्था से खफा युवक 108 एंबुलेंसकर्मियों पर झल्ला गया। वहीं पूणे घूम कर आई एक वृद्धा को भी संदिग्ध मान भर्ती कराया गया।

लंदन से आए युवक ने आरोप लगाया कि पहले 108 एंबुलेंस समय पर नहीं आई। उसके बाद अस्पताल पहुंचाने व वहां 20 से 25 मिनट तक गेट के बाहर खड़ा रखा गया। जबकि उन्हें जितना समय फ्लाइट से जोधपुर आने में नहीं लगा, उतना समय अस्पताल पहुंचाने में लगा दिया गया। उसने कर्मचारियों से सवाल दागा कि आखिर इतना समय क्यों व्यर्थ किया गया?


वहीं पूणे से आई एक वृद्धा को भी एमडीएम अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया और उनका सैंपल लिया गया। जिले के ग्रामीण क्षेत्र से इटली जाकर आए रोगियों के भी एमडीएम अस्पताल में सैंपल लिए गए। दोपहर तक एमडीएम अस्पताल में करीब 6 रोगियों के सैंपल लिए गए। मंडोर सैटेलाइट अस्पताल से आए तीन जर्मन पर्यटकों की स्क्रीनिंग की गई। गनीमत हैं कि जोधपुर में अभी तक एक भी कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज सामने नहीं आया है।

एमडीएम अस्पताल में डर रहे कर्मचारी
एमडीएम अस्पताल में ट्रोली मैन कोरोना वायरस के संदिग्धों को ऊपर बने आइसोलेशन वार्ड ले जाने में घबरा रहे हैं। एक वृद्ध कर्मी गुरुवार को एयरपोर्ट से आए संदिग्धों को ले जाने से कतराता दिखा। उधर, ही 108 एंबुलेंसकर्मियों और एमडीएम अस्पताल के बीच संवादहीनता चल रही है। 108 एंबुलेंस आने की जानकारी भी एमडीएम अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में समय पर पता नहीं लग रही है। 108 एंबुलेंसकर्मियों को मौके पर पहुंचते ही व्हील चेयर व ट्रोली नहीं मिल रही है।

पीपीई किट भी कम हो रहे
जानकारी अनुसार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट उपलब्ध नहीं है। ये पीपीई किट 108 एंबुलेंस में नहीं थे। जिन्हें लेने एंबुलेंस कर्मी स्वास्थ्य भवन गए थे। वहां से किट लेकर उन्हें एमडीएम अस्पताल भेजा गया। ये किट जयपुर से आ रहे है।

इनका कहना
108 एंबुलेंसकर्मी को संदिग्ध मरीजों को ले जाने से पहले पीपीई किट पहना पड़ता है। कई तरह की तैयारी होती है। इस कारण समय लगा।
- प्रीतमसिंह, डिप्टी सीएमएचओ (स्वास्थ्य)



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